जबलपुर में नालों-नालियों से गुजर रही पेयजल की लाइन, दूषित पानी का खतरा

जबलपुर। शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जबलपुर में पेयजल सप्लाई की करीब 1700 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में से 1020 किलोमीटर पाइपलाइन नाले-नालियों के भीतर से होकर गुजर रही है। यानी शहर की लगभग 60 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइनें ऐसे स्थानों से गुजर रही हैं, जहां गंदगी और दूषित पानी का खतरा बना रहता है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।मंच का कहना है कि पेयजल पाइपलाइन की सामान्य आयु लगभग 20 वर्ष होती है, लेकिन जबलपुर में अधिकांश पाइपलाइनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। लंबे समय से नालों और नालियों के संपर्क में रहने के कारण पाइपलाइनों पर रासायनिक प्रभाव पड़ रहा है। इनमें तेजी से जंग लग रही है और कई स्थानों पर लीकेज की समस्या सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में नालियों का गंदा पानी पाइपलाइन के जरिए पेयजल व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

मंच ने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद नगर निगम ने इन पुरानी और असुरक्षित पाइपलाइनों को बदलने के लिए अब तक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तक तैयार नहीं कराया है। शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर नगर निगम की उदासीनता को लेकर नागरिकों में नाराजगी है।

इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। मंच ने मांग उठाई कि नाले-नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों और जर्जर हो चुकी लाइनों का सर्वे कराया जाए तथा प्राथमिकता के आधार पर उन्हें बदला जाए, ताकि शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।प्रदर्शन में डॉ. पीजी नाजपांडे, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, सुभाष चंद्रा, एडवोकेट जीएस सोनकर, एडवोकेट यशवंत कोष्टा, अर्जुन कुमार, ऋषि उपाध्याय और राममिलन शर्मा सहित अन्य लोग शामिल हुए।