*जबलपुर। छह दशकों की अटूट रामभक्ति, आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का साक्षी बना गढ़ा रामलीला मैदान शुक्रवार को श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ भक्तिमय उल्लास से सराबोर हो उठा। षष्ठिपूर्ति के 60वें मंचन महोत्सव का समापन राम राज्याभिषेक और वानर सेना की विदाई की भावपूर्ण लीलाओं के साथ हुआ। जैसे ही सिद्ध मंच पर *“प्रथम तिलक गुरु वशिष्ठ मुनि कीन्हा”* की चौपाई गूंजी, पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु वशिष्ठ की भूमिका निभा रहे परम पूज्य जगद्गुरु राजारामाचार्य जी महाराज ने प्रभु श्रीराम का प्रथम तिलक कर उन्हें अयोध्या के सम्राट के रूप में प्रतिष्ठित किया। इस अलौकिक दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
राज्याभिषेक के साक्षी बने सांसद और महापौर
समारोह में मुख्य अतिथि सांसद आशीष दुबे तथा विशिष्ट अतिथि महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने भी प्रभु श्रीराम का तिलक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अतिथियों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करते हुए जबलपुर में सुख, समृद्धि, शांति और सामाजिक सद्भाव की कामना की। छह दशक से चली आ रही इस रामलीला परंपरा का 60वां आयोजन श्रद्धा के साथ-साथ शहर की सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक बना।
## रामभक्तों और रामलीला परंपरा के सेवकों का सम्मान
महोत्सव के अवसर पर डॉ. अजय तिवारी तथा रामलीला समिति गढ़ा के आजीवन सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष राकेश पाठक का अभिनंदन किया गया। समिति के संचालक पं. अशोक मनोध्याय, अध्यक्ष एवं निर्देशक राजेश मिश्रा, महामंत्री एडवोकेट अरुण दीक्षित, अजेय प्रताप सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने सम्मान समारोह में सहभागिता की।
इस अवसर पर अशोक बघेल ‘दादा भाई’, डॉ. भूपेन्द्र उपाध्याय, हनुमंत सिंह रघुवंशी, गनपत कोष्टा, उमाशंकर मिश्रा, डॉ. रमेश बसेड़िया, केदारनाथ शर्मा, विजय नेमा, राजेश नेमा, पंकज अवस्थी, राजेश परोह, प्रमोद तिवारी, डॉ. नीना उपाध्याय, इंदुलता प्यासी, विनायक तिवारी और नीरज दुबे सहित उपस्थित गणमान्यजनों ने जगद्गुरु राजारामाचार्य जी महाराज की संत-अर्चना की। अतिथियों को पुष्पहार, मोतियों की माला और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। पितृ संस्था गोविंदगंज रामलीला से आए पदाधिकारियों एवं कलाकारों का भी शाल और मोतियों की माला पहनाकर अभिनंदन किया गया।
## आतिशबाजी से जगमगाया मैदान, मिष्ठान वितरण ने बढ़ाया उल्लास
प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ ही रामलीला मैदान आकर्षक आतिशबाजी से रोशन हो उठा। श्रद्धालुओं के बीच मिष्ठान वितरित किया गया और पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया। इसके बाद दूसरे चरण में *“रहा न कोऊ लक्षण हीना”* की चौपाई के माध्यम से रामराज्य की आदर्श परिकल्पना का मंचन किया गया।
रामराज्य की इस प्रस्तुति ने ऐसे समाज का संदेश दिया, जहां न्याय, सद्भाव, मर्यादा और लोककल्याण सर्वोपरि हों। इसके पश्चात प्रभु श्रीराम ने लंका विजय में सहयोग देने वाली वानर सेना के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें विदाई दी। इस भावपूर्ण प्रसंग ने मित्रता, त्याग, सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा की महत्ता को रेखांकित किया।
## छह दशक की परंपरा को जीवंत रखने वालों के प्रति आभार
महोत्सव के समापन पर समिति के संचालक पं. अशोक मनोध्याय ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी पदाधिकारियों, निर्देशक एवं सह-निर्देशक, घर-घर जाकर धनसंग्रह करने वाले सदस्यों, कलाकारों, ग्रीन रूम के सहयोगियों, दानदाताओं तथा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
गढ़ा रामलीला का 60वां मंचन महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन का समापन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही रामभक्ति, लोकसंस्कृति और सामूहिक समर्पण की परंपरा का उत्सव बनकर सामने आया। श्रीराम ही राष्ट्र हैं, राष्ट्र ही श्रीराम। श्रीराम भक्ति का यही मंत्र महान के उद्घोष के साथ श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर इसी आस्था और उल्लास के साथ एकत्र होने का संकल्प लिया।