जबलपुर। शहर की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले बैलेंसिंग रॉक की उपेक्षा को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने पर्यटन विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मंच का आरोप है कि जब महाबलिपुरम के प्राचीन रॉक को संरक्षण दिया जा सकता है, तो जबलपुर के विश्वप्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक की सुरक्षा और पर्यटन विकास के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया।
मंच के अनुसार, पुरातत्व विभाग ने महाबलिपुरम मंदिर के समीप स्थित प्राचीन कृष्णा बटर बॉल को मंदिर परिसर के निकट होने और ऐतिहासिक महत्व के आधार पर संरक्षित किया है। वहीं, जबलपुर का बैलेंसिंग रॉक भी पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मदन महल किले की चट्टानों का हिस्सा बताया जाता है और किले से लगभग 400 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
4 महीने बाद भी नहीं पहुंचे क्षेत्रीय प्रबंधक…..
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने पर्यटन निगम की उदासीनता पर भी नाराजगी जताई। मंच का आरोप है कि क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन शर्मा को जबलपुर में पदस्थ हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक बैलेंसिंग रॉक का अधिकृत निरीक्षण तक नहीं किया। पर्यटन स्थल की स्थिति और संभावनाओं का आकलन किए बिना इसके विकास की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर सवाल खड़े किए गए।
पर्यटन स्थल की अनदेखी ………
बैलेंसिंग रॉक की उपेक्षा के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण, रखरखाव और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए संबंधित विभाग तत्काल ठोस कार्ययोजना तैयार करें। उनका कहना था कि यह स्थल जबलपुर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसकी अनदेखी शहर के पर्यटन हितों के विपरीत है।
प्रदर्शन के दौरान डॉ. पी.जी. नागपांडे, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, डी.के. सिंह, संतोष श्रीवास्तव, सुभाष चंद्रा, डी.आर. लखेरा, अशोक यादव, के.सी. सोनी, यशवंत कोष्टा, श्याम सोलंकी, अशोक नामदेव, विनय दुबे, धर्मेंद्र पांडे और राममिलन शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मंच ने मांग की कि पर्यटन निगम और पुरातत्व विभाग बैलेंसिंग रॉक की स्थिति का निरीक्षण कर संरक्षण एवं विकास के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि इस महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल को उपेक्षा से बचाया जा सके।