छात्रसंघ चुनाव की अंतिम मार्गदर्शिका जल्द जारी करने की मांग, याचिकाकर्ता अदनान अंसारी ने उच्च शिक्षा विभाग को सौंपा ज्ञापन, प्रत्यक्ष निर्वाचन सहित कई मांगें उठाईं

जबलपुर। लंबे अंतराल के बाद प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रक्रिया तेज करने की मांग उठने लगी है। युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव एवं छात्रसंघ चुनाव के याचिकाकर्ता अदनान अंसारी के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा छात्रसंघ चुनाव का रोडमैप तैयार करने के लिए गठित समिति के सदस्य एवं अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, जबलपुर संभाग प्रो. अलकेश चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में उच्च न्यायालय के आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करते हुए छात्रसंघ चुनाव की अंतिम मार्गदर्शिका और निर्वाचन कार्यक्रम शीघ्र सार्वजनिक करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि सितंबर माह शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक अंतिम नियमावली और चुनाव कार्यक्रम सामने नहीं आया है। ऐसे में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तैयारियों के लिए पर्याप्त समय देने के लिए निर्वाचन कार्यक्रम जल्द घोषित किया जाना चाहिए।

विश्वविद्यालय स्तर पर प्रत्यक्ष मतदान की मांग….

ज्ञापन में विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे प्रमुख पदों के लिए शिक्षण विभागों, अध्ययन केंद्रों तथा संबद्ध महाविद्यालयों के पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष मतदान का अधिकार देने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं में प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और मिश्रित निर्वाचन व्यवस्थाओं के विकल्पों का उल्लेख है। वर्तमान व्यवस्था में महाविद्यालय स्तर पर प्रत्यक्ष निर्वाचन के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर प्रतिनिधियों के माध्यम से निर्वाचन होता है। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव पुनः शुरू होने पर व्यापक विद्यार्थी भागीदारी वाली निर्वाचन व्यवस्था पर विचार करने की मांग की गई।

संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर के चुनाव में प्रभावी भागीदारी देने तथा आवश्यकता होने पर संबंधित अध्यादेश में संशोधन करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

ATKT, Gap और आयु सीमा में संक्रमणकालीन राहत की मांग……

प्रतिनिधिमंडल ने करीब नौ वर्ष के चुनावी अंतराल को देखते हुए ATKT और अध्ययन में Gap को वर्ष 2026 के चुनाव में स्वतः अयोग्यता का आधार नहीं बनाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि इस अवधि में कोविड-19 महामारी, शैक्षणिक सत्रों में व्यवधान, परीक्षाओं और परिणामों में देरी जैसी परिस्थितियों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई।

इसी आधार पर वर्तमान में नियमित रूप से अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्थिति को प्राथमिकता देने और चुनावी अंतराल को देखते हुए आयु सीमा में भी युक्तिसंगत संक्रमणकालीन छूट देने का सुझाव दिया गया।

5 हजार की व्यय सीमा पर भी उठाए सवाल……..

छात्रसंघ चुनाव में निर्धारित निर्वाचन व्यय सीमा को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने की मांग भी की गई। ज्ञापन में कहा गया कि करीब दो दशक पहले निर्धारित ₹5,000 की सीमा वर्तमान महंगाई और निर्वाचन संबंधी वास्तविक खर्चों के अनुरूप नहीं है। इसके साथ ही प्रत्याशियों के खर्च का पारदर्शी लेखा-जोखा और निगरानी व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई।

डिजिटल प्रचार की अनुमति देने की मांग………

प्रतिनिधिमंडल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से प्रचार की अनुमति देने के साथ निर्धारित व्यय सीमा और आचार संहिता के तहत सीमित मुद्रित प्रचार सामग्री के इस्तेमाल की मांग की। साथ ही परिसर की दीवारों को खराब करने, बाहरी व्यक्तियों की भागीदारी, जाति या धर्म के आधार पर प्रचार, भ्रामक सामग्री और अनावश्यक खर्च पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया।

अदनान अंसारी ने कहा कि “छात्रसंघ चुनाव केवल चुनाव कराने की औपचारिकता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक नेतृत्व और प्रतिनिधित्व का अवसर देने की प्रक्रिया है।” उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मार्गदर्शिका और निर्वाचन कार्यक्रम में अब और विलंब नहीं होना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल में एनएसयूआई प्रदेश सचिव प्रतीक गौतम, एजाज अंसारी, अरुण शुक्ला, सैफ अली, अनुराग शुक्ला, हर्ष श्रीवास, अनिकेत पटेल, लक्ष्य चौकसे और वाकर खान सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि मौजूद रहे।