जबलपुर, । सावन माह के दूसरे सोमवार को निकलने वाली संस्कार कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं संस्कार कांवड़ यात्रा सोमवार आज सुबह 7 बजे मां नर्मदा तट गौरीघाट से प्रारंभ होगी। यात्रा बादशाह हलवाई मंदिर, रामपुर चौक, छोटी लाइन फाटक, शास्त्री ब्रिज, तीन पत्ती चौक, मालवीय चौक, बड़ा फुहारा, सराफा चौक, बेलबाग तिराहा, घमापुर चौक, कांचघर चौक, सतपुला ब्रिज, पनेहरा पेट्रोल पंप, गोकलपुर, रांझी, खमरिया बाजार होते हुए मटामर स्थित कैलाशधाम मंदिर पहुंचेगी।
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम ….
गौरीघाट से मटामर तक के निर्धारित रूट और अन्य संपर्क मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। कांवड़ शिविरों और प्रमुख चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, वहीं सादे कपड़ों में भी जवान निगरानी रखेंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी रोकी जा सके। यात्रा मार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गई है, और जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन भी लागू किया जाएगा।
एम्बुलेंस, दमकल और क्रेन रहेंगे तैनात ….
यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रमुख बिंदुओं पर एंबुलेंस, दमकल और क्रेन वाहन तैनात किए जाएंगे। तीनों ट्रैफिक थानों सहित संबंधित थाना क्षेत्रों की पुलिस फोर्स को फील्ड में सक्रिय रखा गया है। साथ ही अतिरिक्त बल भी रूट पर तैनात रहेगा ताकि किसी भी स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।
शिविर आयोजकों के लिए दिशा-निर्देश …..
प्रशासन ने कांवड़ शिविर आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने शिविर मुख्य राजमार्गों से कम से कम 100 फीट और आंतरिक सड़कों से 50 फीट की दूरी पर स्थापित करें। लाउडस्पीकर का उपयोग धीमी आवाज में किया जाए ताकि स्थानीय लोगों को असुविधा न हो। शिविर संचालन में सामाजिक समरसता और शांति बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
मैदान में अधिकारी…
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसपी सम्पत उपाध्याय ने कांवड़ यात्रा रूट और मटामर क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने खमरिया और मटामर से लौटते समय होने वाली भीड़ की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
श्रद्धालुओं से प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के निर्धारित मार्ग का ही पालन करें, नियमों का पालन करें और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें। यह यात्रा श्रद्धा, संयम और अनुशासन का प्रतीक है, इसलिए इसे शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सभी की सहभागिता आवश्यक है।