जबलपुर। बरगी क्षेत्र के ग्राम मोठार में गुरुवार को एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई, जिसने विकास और मूलभूत सुविधाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इलाज के दौरान दम तोड़ चुकी 11 वर्षीय बच्ची का शव सडक़ की बदहाली के कारण परिजनों को हाथ ठेले पर गांव तक ले जाना पड़ा। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। आजादी के अमृतकाल में इस तरह की मार्मिक घटनाएं हृदय को पीड़ा पहुंचाती है और जनप्रतिनिधियों के कथित वायदों व संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मोठार निवासी रामस्वरूप मरावी की 11 वर्षीय पुत्री माया मरावी का नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में उपचार के दौरान निधन हो गया। परिजन निजी वाहन से शव लेकर गांव लौट रहे थे, लेकिन गांव से पहले ही कीचड़ और जर्जर सडक़ में वाहन फंस गया। काफी प्रयासों के बावजूद वाहन आगे नहीं बढ़ सका और उसे वापस लौटाना पड़ा।
मजबूरी में ग्रामीणों ने बरगी नगर से एक हाथ ठेला मंगवाया। इसके बाद मासूम बच्ची के शव को उसी ठेले पर रखकर गांव तक पहुंचाया गया। इस दर्दनाक घटना ने ग्रामीणों को झकझोर दिया और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को उजागर कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि मोठार गांव की सडक़ वर्षों से बदहाल है। बरसात के मौसम में गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। उनका आरोप है कि कई बार 108 एम्बुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंचती और मरीजों को मुख्य सडक़ तक लाने या वहीं छोडऩे की नौबत आ जाती है।
घटना के बाद शंकर लाल वरकड़े, लेखराम, वृंदावन वरकड़े, धुरन सिंह, साजन यादव, पुन्नूलाल, पंजीलाल कुलस्ते, राजू गोंड, नर्मदा प्रसाद, रतीराम, ओम सिंह, प्रकाश मसराम, वीर सिंह परस्ते, ब्रजकिशोर, महेश यादव, रंजीत मरावी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सडक़ निर्माण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी परिवार को भविष्य में ऐसी पीड़ा और विवशता का सामना न करना पड़े, इसके लिए क्षेत्र की बदहाल सडक़ और स्वास्थ्य सुविधाओं में शीघ्र सुधार किया जाना आवश्यक है।