जबलपुर से संस्थानों की शिफ्टिंग पर बढ़ा विरोध, उपराजधानी का दर्जा देने की उठी मांग


जबलपुर। जबलपुर से प्रमुख शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों की लगातार हो रही शिफ्टिंग को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने गहरी नाराजगी जताई है। मंच का कहना है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी (एमयू) के एक हिस्से और डेयरी साइंस कॉलेज को जबलपुर से हटाए जाने के फैसले से शहर की पहचान और विकास प्रभावित हो रहा है। इस पर जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है और इसकी भरपाई के लिए जबलपुर को उपराजधानी का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है।
रामनगर स्थित नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच कार्यालय में आयोजित बैठक में मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जबलपुर की महत्वपूर्ण संस्थाओं को दूसरे शहरों में स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे महाकौशल क्षेत्र की उपेक्षा का भाव गहरा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले “जबलपुर को उपराजधानी बनाओ” आंदोलन के कारण इस तरह के निर्णयों पर रोक लगी थी, लेकिन आंदोलन कमजोर पड़ने के बाद फिर से संस्थानों की शिफ्टिंग शुरू हो गई।
बैठक में हाल ही में जारी राजपत्र का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उज्जैन स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी को “धन्वंतरि” नाम दिए जाने का प्रावधान है, जबकि जबलपुर की मेडिकल यूनिवर्सिटी को केवल स्वास्थ्य से जुड़े सामान्य नाम तक सीमित रखने पर भी आपत्ति जताई गई। मंच ने इसे जबलपुर की ऐतिहासिक और शैक्षणिक पहचान के साथ भेदभाव बताया।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार लगातार जबलपुर से संस्थानों का स्थानांतरण करती रही तो इसका सीधा असर क्षेत्र के विकास, शिक्षा और रोजगार पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि जबलपुर से संस्थानों की शिफ्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा शहर की भरपाई के लिए उसे उपराजधानी का दर्जा दिया जाए।
बैठक में रजत मार्गव, टी.के. रायचंदक, सुभाष चंदा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, वेदप्रकाश अघोलिया, डी.के. सिंह, संतोष श्रीवास्तव, मनीष शर्मा, पी.एस. राजपूत, के.पी. सोनी, डी.एन. कमलकर, एच. घनश्याम सोनकर और प्रशांत साहू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।