जबलपुर। देश के स्वच्छ शहरों में पांचवां स्थान हासिल करने और स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बावजूद जबलपुर के श्रीनाथ की तलैया और शहर की प्रमुख फूल मंडी बदहाली का शिकार हैं। यहां टूटी सड़कें, जाम और ओवरफ्लो नालियां, जगह-जगह फैला कचरा और मलबा स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोल रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई के बाद निकाला गया मलबा कई दिनों तक वहीं छोड़ दिया जाता है, जो बारिश के साथ फिर से नालियों में पहुंचकर जलनिकासी व्यवस्था को ठप कर देता है। हालत यह है कि नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।श्रीनाथ की तलैया मैदान पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। कुछ वर्ष पहले यहां पार्क विकसित करने की घोषणा की गई थी, लेकिन वह योजना आज तक धरातल पर नहीं उतर सकी। क्षेत्र में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या, कचरे और मलबे के ढेर तथा गंदगी अब आम दृश्य बन चुके हैं। शहर की एकमात्र प्रमुख फूल मंडी की स्थिति भी बेहद खराब है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर निगम, जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क, नाली और सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो बरसात के दौरान हालात और भी विकट हो सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि श्रीनाथ की तलैया और फूल मंडी की इस बदहाली की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा—पार्षद, विधायक या नगर निगम के अधिकारी? स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन तत्काल क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे, ताकि स्मार्ट सिटी का दर्जा केवल कागजों तक सीमित न रहे।