जबलपुर । बरगी डैम में गुरुवार को हुए क्रूज हादसे के बाद लापता चार लोगों की तलाश के लिए शनिवार सुबह 7 बजे से सर्च आपरेशन फिर से शुरू किया गया। बचाव कार्य में सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें नौकाओं की मदद से लापता लोगों को खोज रही हैं। इस हादसे में ओएफके कर्मी 45 वर्षीय कामराज, और 9 वर्षीय मयूरन सहित दो लोग अभी भी लापता हैं। वहीं देर शाम 4 वर्ष की कोतवाली निवासी विराज सोनी और वेस्टलैंड खमरिया निवासी 6 वर्षी श्री tilm के शव रेस्क्यू टीम को देर शाम मिले है। मौसम खराब होने की वजह से चल रही तेज तूफानी हवाओं के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है| रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ साथ सेना की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है|
दिल्ली , तमिलनाडु पर्यटकों के शव एयरलिफ्ट किए गए……….
मृतकों के शवों को उनके गृह ग्राम तमिलनाडु के त्रिची भेजने को लेकर प्रशासन ने पहले असमंजस की स्थिति बना ली थी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मिलकर मदद का भरोसा दिया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रात को प्रशासन ने कह दिया कि शव के साथ केवल एक व्यक्ति ही जा सकता है और बाकी सदस्यों को अपने टिकट खुद बुक करने होंगे। इस संबंध में कामराज के साथी कर्मचारी अर्नब दास गुप्ता ने बताया कि मृत शरीर खराब होने लगे हैं और पीड़ित परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं। बताया जाता है कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री के कर्मचारियों द्वारा दी गई विरोध की चेतावनी के बाद प्रशासन हरकत में आया और इसके बाद एसडीएम रांझी ने परिवार को आश्वस्त किया कि परिजनों को भी फ्लाइट से तमिलनाडु भिजवाया जा रहा है। शनिवार दोपहर बाद शवों को चार्टर विमान से कोयंबटूर के रास्ते त्रिची भेजा जा रहा है। हालांकि यह भी खबर है कि विमानन ट्रेफिक कंट्रोल और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के अभाव के चलते शवों को डुमना विमान तल पर पूर्वान्ह 11 बजे ही लाया गया जबकि विमान यहां सांय 4 बजे पहुंच रहा है। वहीं दिल्ली से जबलपुर आए और यहां हादसे के शिकार परिवार के तीन सदस्यों के शव सुबह कागो विमान से गंतव्य को रवाना कर दिए गए हैं।
नहीं मिली थी मौसम की चेतावनी
बरगी डैम हादसे का कारण बने क्रूज के पायलट (हादसे के बाद सेवा से बर्खास्त) महेश पटैल ने पहली बार एक न्यूज चैनल के कैमरे के सामने आकर पहली बार हाथ जोड़कर हादसे के शिकार पीड़ित परिवारों से माफी मांगी है। इस दौरान उसने बताया कि यात्रा के समय मौसम सामान्य था, लेकिन बीच में पहुंचते ही अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। हालात बिगड़ते देख उन्होंने तुरंत नाव को वापस मोड़ दिया, हालांकि, तूफान अचानक बहुत तेज हो गया और नाव से ऊंची‑ऊंची लहरें टकराने लगीं और कुछ ही देर में नाव के अंदर पानी भरना शुरू हो गया, जिससे यात्रियों में अफरा‑तफरी मच गई।
चेतावनी या लौटने का निर्देश नहीं मिला …………….
पायलट पटैल ने कहा कि मैंने तुरंत रिसेप्शन को सूचना दी और दुर्घटना की आशंका जताते हुए दूसरी नाव भेजने का अनुरोध किया था। उसका कहना है कि शुरुआत में यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया, क्योंकि उस समय कई लोग नाच‑गाना कर रहे थे और आनंद ले रहे थे। पायलट महेश पटेल ने यह भी दावा किया कि खराब मौसम को लेकर उन्हें किसी तरह की आधिकारिक चेतावनी या लौटने का निर्देश नहीं दिया गया था. उसने यह भी बताया कि उसे क्रूज चलाने का 15 साल से अधिक का अनुभव है और वह पूरी तरह प्रशिक्षित है। उसने अपने पूरे करियर में उन्होंने ऐसा हालात पहले कभी नहीं देखा। पायलट के अनुसार, जब नाव किनारे से करीब 100 मीटर दूर थी, तब उसे एहसास हुआ कि सुरक्षित तरीके से पहुंच पाना मुश्किल हो सकता है. इसी दौरान इंजन रूम में पानी भरने लगा, जिसके बाद नाव पर से नियंत्रण पूरी तरह खो गया, और वह किनारे तक पहुंचने से पहले ही डूब गई।
पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में ………….
मौसम विभाग द्वारा पहले ही तेज हवाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया था, इसके बावजूद नर्मदा नदी में क्रूज संचालन जारी रखा गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मौसम विभाग के प्री-अलर्ट पर ध्यान नहीं दिया गया। स्टाफ ने अपने अनुभव और मोबाइल पर उपलब्ध मौसम रिपोर्ट के आधार पर ही निर्णय लिया। नियमों के अनुसार खराब मौसम की स्थिति में क्रूज संचालन रोक दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक जानकारी के मुताबिक मेकल रिसॉर्ट, बरगी के सीसीटीवी फुटेज में 43 पर्यटक क्रूज पर सवार होते नजर आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ पर्यटकों ने बिना टिकट ही यात्रा की। बरगी क्रूज हादसे में मप्र पर्यटन निगम की लापरवाही भी सामने आ रही है। मौसम का प्री-अलर्ट होने के बाद भी अनदेखी की गई। शुरुआती जांच के साथ ही पायलट के कथन के अनुसार वाटर स्पोर्ट्स से जुड़े कर्मियों को प्री-अलर्ट मिला ही नहीं। वे सिर्फ लहरों और अनुभव के आधार पर ही मौसम का आकलन करते हैं। अधिकारियों का तो कहना है कि यहां मौसम की स्थिति मोबाइल पर भी देखी जाती है। मप्र पर्यटन निगम का क्रूज गुरुवार शाम मेकल रिसॉर्ट से पर्यटकों को लेकर निकला था, लेकिन सुरक्षा इंतजामों में भारी लापरवाही सामने आई। सबसे बड़ी चूक यह रही कि यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई।
लाइफ सेवर का पालन नहीं………..
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी अधिकांश पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के नजर आए। हादसे के दौरान जिन यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी, वे अपनी जान बचाने में सफल रहे। नियम के मुताबिक 10-15 पर्यटकों पर एक लाइफ सेवर होना चाहिए, लेकिन यहां इसका पालन नहीं हुआ। क्रूज में कैप्टन महेश के अलावा केवल एक कर्मचारी छोटू मौजूद था। यानी 42 पर्यटकों के लिए सिर्फ दो स्टाफ ही थे, जो पर्याप्त नहीं थे।
20 साल पुराना क्रूज सुरक्षित होने का दावा………….
मप्र पर्यटन निगम में जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम ने लापरवाही के आरोपों पर कहा कि क्रूज 20 साल पुराना जरूर था, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल था। उन्होंने बताया कि एफआरपी कंपनी के इस क्रूज की आयु 50 वर्ष तक होती है। क्रूज में 80 लाइफ जैकेट मौजूद थीं। आमतौर पर क्रूज या बड़े जहाजों में पर्यटक यात्रा के दौरान लाइफ जैकेट नहीं पहनते, बल्कि जरूरत पड़ने पर ही उपयोग करते हैं। मौसम को लेकर जल क्रीड़ा सलाहकार का कहना है कि मौसम को लेकर कई बार अचानक मौसम खराब हो जाता है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। उनके अनुसार स्टाफ मोबाइल पर मौसम की जानकारी देखता है और उसी आधार पर निर्णय लिया जाता है। क्रूज कैप्टन के पास लंबा अनुभव था और वह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स से प्रशिक्षित था। सहयोगी स्टाफ भी प्रशिक्षित था।
दो अभी भी लापता
हादसे में आयुध निर्माणी खमरिया के ए 3 सेक्शन में कार्यरत कामराज आर्य के परिवार के सदस्य शामिल थे। कामराज परिवार के 15 सदस्यों के साथ घूमने पहुंचे थे, जिनमें से उनके माता-पिता डैम के किनारे बैठे थे, जबकि कामराज की पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में सवार थे। हादसे के दौरान उनका 10 वर्षीय बेटा लहरों के सहारे किनारे आ गया था, जिसे जल निगम के कर्मचारियों ने बचा लिया था। हादसे में , 45 वर्षीय कामराज, और 9 वर्षीय मयूरन सहित 2 लोग अभी भी लापता हैं।