वनभूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा गरमाया,लाखों एकड़ जंगल सिमटने पर जताई चिंता

जबलपुर। मध्यप्रदेश में वनभूमि को गैर-वन कार्यों में उपयोग किए जाने और लाखों एकड़ जमीन पर अतिक्रमण के मुद्दे ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने वनभूमि पर कथित अतिक्रमण, जंगलों के सिमटने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने का मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा से हस्तक्षेप की मांग की है। मंच ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में वनभूमि संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।

14.21 लाख एकड़ वनभूमि पर अतिक्रमण का दावा………..

मंच ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि मध्यप्रदेश में करीब 14.21 लाख एकड़ वनभूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है। मंच का कहना है कि वनभूमि को अतिक्रमण के जरिए जंगलों से अलग किया जाना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है। जंगलों के क्षेत्रफल में कमी आने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में वनभूमि की सुरक्षा को राजनीतिक खींचतान से अलग रखकर गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

बुधनी में अतिक्रमण हटाने के बाद राजनीति पर सवाल………….

मंच ने सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक स्थिति चिंताजनक हो गई है। मंच ने सवाल उठाया कि यदि वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, तो उसे राजनीतिक विवाद का विषय क्यों बनाया जाना चाहिए।

मंच के अनुसार, वनभूमि और जंगलों के संरक्षण के मामले में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीतिक खींचतान से बचना जरूरी है।

राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे विवेक तन्खा…………

ज्ञापन के संबंध में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि वनभूमि और वन्यजीवों का संरक्षण बेहद जरूरी है तथा इस दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने आवश्यक कार्रवाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखने की बात कही।

पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग…………

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मांग की कि वनभूमि पर अतिक्रमण के मामलों की गंभीरता से समीक्षा की जाए और जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। मंच का कहना है कि वनभूमि का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और वन्यजीवों के अस्तित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।इस अवसर पर डॉ. पी.जी. नाजपांडे, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, सुभाष चंद्रा, अशोक यादव, विवेक दुबे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। ज्ञापन 17 अक्टूबर 2026 को सौंपा गया।