जबलपुर संस्कारधानी के समस्त गुरुद्वारों में सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोबिंद साहिब का पवित्र प्रकाशोत्सव गुरुपर्व पूर्ण आस्था विश्वास और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा गोरखपुर में आयोजित भव्य कीर्तन दरबार में हुजूरी रागी जत्था भाई बलजीत सिंह एवं साजिंदे साथियों ने गुरुवाणी शबद कीर्तन पेश कर साध संगत को रसविभोर किया। जबलपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रजिंदर सिंह छावड़ा ने बताया कि गुरु हरगोबिंद साहिब ने अमृतसर में श्री अकालतख्त साहिब की स्थापना की थी जोकि विश्व सिखों की सर्वोच्च संस्था है। गुरुजी ने अत्याचार से लड़ने और धर्म व शांति की रक्षा के लिए मीरी और पीरी की दो कृपाण धारण कर सेनाओं का गठन किया और मुगल आक्रांताओं से युद्ध में जीत हांसिल की । ग्वालियर के किले में मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से 52 हिन्दू राजाओं को रिहा कराया, जिससे उन्हें दाता बन्दी छोड़ की उपाधि प्राप्त हुई। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी हरजीत सिंह खालसा ने सर्वत्र के भले की अरदास प्रार्थना संपन्न करवाई । श्री सुरिन्दर सिंह तलवार बंटी वीरजी के साथ ही सेवादारों को सिरोपा प्रदान कर सम्मानित किया गया। मनप्रीत सिंह आहूजा मिक्की ने संचालन किया । इस अवसर पर देशभर के गुरुद्वारों में कीर्तन दरबार के साथ ही परंपरागत मक्खन, दही, अचार एवं प्याज के साथ मिस्सी रोटी और लस्सी का विशेष गुरु का लंगर वितरित किया गया ।