जबलपुर। जनसुनवाई में फरियाद लेकर पहुंचने वाला हर व्यक्ति उम्मीद लेकर आता है, लेकिन मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय परिसर में एक परिवार की उम्मीद व्यवस्था के दरवाजे पर ही टूट गई। गोहलपुर निवासी मोहम्मद अजीज अपने गंभीर रूप से दिव्यांग छोटे भाई मोहम्मद रईस को व्हीलचेयर पर लेकर बीपीएल कार्ड बनवाने की गुहार लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे। आरोप है कि प्रवेश को लेकर सुरक्षा कर्मचारी से हुई बहस के बाद वे इतने आहत हुए कि अपना आवेदन वहीं फाड़ दिया।करीब दो साल पहले स्लीमानाबाद स्थित तरुण तारण सागर महाराज मंदिर ट्रस्ट की इमारत में पुताई के दौरान रईस बिजली के करंट की चपेट में आ गए थे। करंट लगने के बाद वे करीब 25 फीट की ऊंचाई से नीचे जा गिरे। हादसे में उनकी रीढ़ और शरीर के निचले हिस्से को गंभीर नुकसान पहुंचा। इलाज के बाद उनके हाथ-पैरों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हुई और वे रोजमर्रा के कामों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गए।
इलाज में जमा पूंजी तक चली गई
हादसे के बाद परिवार ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज समेत कई अस्पतालों में रईस का लंबे समय तक इलाज कराया। बाद में उन्हें नागपुर एम्स भी ले जाया गया। लगातार इलाज और जांच में परिवार की जमा पूंजी खत्म हो गई। आज हालत यह है कि रईस की देखभाल के साथ महंगे इलाज का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल हो गया है।
परिवार के मुताबिक नागपुर में चिकित्सकों ने बीपीएल कार्ड बनवाने की सलाह दी थी, ताकि पात्रता के आधार पर जांच और दवाओं के खर्च में सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इसी उम्मीद में अजीज मंगलवार दोपहर भाई को व्हीलचेयर पर लेकर कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में पहुंचे थे।
दरवाजे पर ही टूट गई उम्मीद
परिजनों का आरोप है कि कलेक्टर कक्ष के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मचारी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। अजीज ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी से अपनी समस्या बताने और एक बार मिलने की गुहार लगाई, लेकिन कथित तौर पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुरक्षा कर्मचारी से तीखी बहस के बाद अजीज निराश हो गए और उन्होंने अपना आवेदन पत्र फाड़ दिया।यह घटना केवल एक आवेदन फाड़े जाने की नहीं, बल्कि उस परिवार की बेबसी की तस्वीर है, जो दो साल से इलाज, आर्थिक संकट और दिव्यांगता के बीच किसी सरकारी सहायता की उम्मीद लगाए बैठा है। सवाल यह है कि यदि जनसुनवाई में भी व्हीलचेयर पर आए गंभीर रूप से दिव्यांग व्यक्ति की बात सुनने का रास्ता आसान नहीं होगा, तो वह अपनी समस्या आखिर किस दरवाजे पर लेकर जाए?