जबलपुर-समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जनपरामर्श बैठक गुरुवार को भंवरताल गार्डन स्थित संस्कृति थिएटर में आयोजित की गई। बैठक में समिति के प्रमुख सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि देश में वर्तमान में दो दर्जन से अधिक ऐसे कानून हैं, जिनमें एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है, न कि किसी धर्म या धार्मिक मान्यता में हस्तक्षेप करना।
श्री सिंह ने कहा कि समिति समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में जनता के विचार जानने के लिए विभिन्न स्थानों पर संवाद कर रही है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का संबंध परिवार से जुड़े कानूनों, जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और पारिवारिक अधिकारों से है। वर्तमान में देश में अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, लेकिन पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। इसी कारण समान परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। श्री सिंह ने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं अत्यंत प्राचीन हैं। समय के साथ विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के अपने-अपने पारिवारिक कानून विकसित हुए। यहां तक कि एक ही धर्म के भीतर भी अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के आधार पर कानूनों में भिन्नता देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज पुरुष प्रधान रहा है, जिसके कारण अधिकांश पारंपरिक कानूनों में पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक अधिकार प्राप्त हुए। हालांकि समय के साथ सामाजिक परिस्थितियां बदली हैं और महिलाओं के अधिकारों तथा समानता के प्रश्न को अधिक महत्व मिला है। उन्होंने कहा कि आज तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के युग में यह विचार करना आवश्यक है कि क्या पुराने सामाजिक ढांचों पर आधारित व्यवस्थाओं को यथावत रखा जाए या उन्हें वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए। श्री सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता का इतिहास काफी पुराना है। आजादी से पहले ही इसका प्रारूप तैयार कर लिया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका। अपने संबोधन में उन्होंने संविधान सभा की चर्चाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान समान नागरिक संहिता पर व्यापक बहस हुई थी। एक पक्ष का मानना था कि व्यक्तिगत कानून धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े हैं, इसलिए उनमें हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। वहीं दूसरे पक्ष का मत था कि सामाजिक सुधार, समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनों में समय-समय पर बदलाव आवश्यक हैं।समिति के सदस्य श्री सिंह ने कहा कि संविधान सभा में डॉ. भीमराव अंबेडकर, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी और अन्य कई सदस्यों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष में अपने विचार रखे थे। उनका मानना था कि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए और कानूनों में एकरूपता राष्ट्रीय एकता तथा सामाजिक समरसता को मजबूत कर सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि अनेक देशों ने समय के साथ अपने पारिवारिक कानूनों में सुधार किए हैं और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें आधुनिक बनाया है।
श्री सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता पर आज भी वही तर्क सामने आते हैं जो संविधान सभा की बहसों के दौरान रखे गए थे। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं, जबकि अन्य इसे समान अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य किसी पर कोई विचार थोपना नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की राय जानना और उसे अपनी रिपोर्ट में शामिल करना है।
सदस्य श्री सिंह ने उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए पूछा कि क्या यूसीसी लागू होने से किसी के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। उन्होंने विवाह, विवाह विच्छेद और निकट संबंधियों में विवाह जैसे विषयों पर सभी धर्मों के लिए समान कानून बनाए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपने सुझाव रखे। विधायक श्री अशोक रोहाणी ने कहा कि देश में युवाओं की आबादी 60 प्रतिशत है, समिति को सोशल मीडिया के माध्यम से भी समान नागरिक संहिता के संबंध में युवाओं से मत प्राप्त करना चाहिए। विधायक श्री नीरज सिंह ने कहा कि वर्तमान में लिव-इन रिलेशनशिप का चलन बढ़ रहा है और संबंध टूटने की स्थिति में महिलाओं को कानूनी अधिकार नहीं मिल पाते। ऐसे मामलों में महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।विधायक डॉ अभिलाष पांडेय ने कहा कि विवाह की न्यूनतम आयु तो निर्धारित कर दी गई है, लेकिन ऑटिज्म जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में विवाह की उपयुक्त आयु और किन परिस्थितियों में विवाह नहीं होना चाहिए, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए।जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आशा मुकेश गोटिया ने कहा कि विवाह की उम्र 18 की जगह 21 होना चाहिए, क्योंकि 18 तक बेटियां 12वी तक ही पढ़ पाती हैं, विवाह की उम्र बढ़ने से उनकी कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी हो सकेगी। ऐसे ही लड़कों की उम्र 24 तक की जा सकती हैं, ताकि वे पढ़ लिखकर अपनी आजीविका का साधन बना सके।भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन ने बेटियों की विवाह योग्य आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का सुझाव दिया। नगर निगम अध्यक्ष रिंकूज विज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आजादी के बाद देश की जनसंख्या संरचना में बदलाव आया है और इस विषय पर व्यापक दृष्टिकोण के साथ विचार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने समान नागरिक संहिता को समाज में समानता और एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।पूर्व विधायक संजय यादव ने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को अधिकार तो मिले हैं, लेकिन कई स्थानों पर पुरुष ही उनके स्थान पर हस्ताक्षर कर निर्णय लेते हैं, जबकि महिलाएं केवल नाममात्र की प्रतिनिधि बनकर रह जाती हैं। इसे रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाए जाने चाहिए। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने यूसीसी का धार्मिक रीति-रिवाजों पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट करने की मांग की।
बैठक के समापन पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बैठक में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता रही और उपस्थित लोगों ने बहुमूल्य सुझाव दिए। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव समिति के समक्ष रखे, जिन्हें अध्ययन एवं परीक्षण के लिए दर्ज किया गया।
जन परामर्श बैठक में समान नागरिकता संहिता के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री अनूप नायर, प्रो. गोपाल शर्मा, श्री बुधपाल सिंह एवं डॉ. शोभा पैठणकर, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक श्री अजय विश्नोई, विधायक श्री संतोष वरकड़े, जबलपुर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री संदीप जैन एवं उपाध्यक्ष श्री प्रशांत केसरवानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री विवेक पटेल, भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, कांग्रेस नगर अध्यक्ष श्री सौरभ नाटी शर्मा, कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष श्री संजय यादव, डॉ जितेंद्र जामदार, पार्षद श्री कमलेश अग्रवाल, एमआईसी सदस्य, पार्षद, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, ज्वाइंट कमिश्नर कविता बाटला, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत तथा प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक भी मौजूद थे।