मप्र स्टेट बार काउंसिल की मतगणना में वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वरम नीखरा को नहीं मिला जरूरी कोटा

जबलपुर। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव की मतगणना के 17वें दिन बड़ा उलटफेर सामने आया है। काउंसिल के रिकॉर्ड पांच बार चेयरमैन रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर नीखरा चुनाव की दौड़ से बाहर हो गए हैं। उनके साथ सतना के अधिवक्ता हरीश कुमार द्विवेदी भी जरूरी कोटा हासिल नहीं कर पाने के कारण चुनाव से बाहर हो गए। बार राजनीति के सबसे अनुभवी चेहरों में शामिल नीखरा का बाहर होना चुनाव प्रक्रिया का अब तक का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।मुख्य चुनाव अधिकारी सेवानिवृत्त जस्टिस एसके पालो के अनुसार, 17वें दिन वरीयता मतों के हस्तांतरण और कम मत पाने वाले उम्मीदवारों को चुनाव से बाहर करने की प्रक्रिया के दौरान रामेश्वर नीखरा और हरीश कुमार द्विवेदी चुनाव से बाहर हुए। इनके बाहर होने के साथ ही अब तक 86 उम्मीदवार चुनाव की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।

1979 में पहली बार बने थे बार काउंसिल सदस्य

रामेश्वर नीखरा का मध्य प्रदेश की बार राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वे वर्ष 1979 में पहली बार स्टेट बार काउंसिल के सदस्य निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वे लगातार नौ बार सदस्य चुने गए। अपने लंबे कार्यकाल में वे पांच बार चेयरमैन भी निर्वाचित हुए।काउंसिल में लंबे अनुभव और प्रभाव के कारण नीखरा मध्य प्रदेश की बार राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। ऐसे में इस बार मतगणना के दौरान उनका चुनाव से बाहर होना अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

वरीयता मतों से बदलेंगे समीकरण

मतगणना में कम मत पाने वाले उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद उनके वरीयता मत बाकी उम्मीदवारों को दिए जा रहे हैं। इससे कई प्रत्याशियों की स्थिति में बदलाव आ सकता है।रामेश्वर नीखरा के बाहर होने के बाद उनके वरीयता मत भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन मतों का लाभ किस उम्मीदवार को मिलता है, इसका असर आगे की मतगणना पर पड़ सकता है।

अनुभवी चेहरे के बाहर होने से मुकाबला  दिलचस्प

पांच बार चेयरमैन रह चुके नीखरा के चुनाव से बाहर होने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। 17वें दिन का नतीजा यह भी बता रहा है कि लंबे समय से बार की राजनीति में सक्रिय वरिष्ठ उम्मीदवारों के लिए भी इस बार का चुनाव आसान नहीं है।अब आगे की मतगणना में हर चरण के साथ नए उम्मीदवारों के बाहर होने और उनके वरीयता मतों के दूसरे प्रत्याशियों को मिलने से चुनावी तस्वीर बदलती रहेगी।