जयंती पर  स्मरण बुंदेली संस्कृति के संरक्षक थे डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव

जबलपुर। बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक साहित्य, कला, परंपराओं और बुंदेली बोली के संरक्षण एवं संवर्धन में डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। जब हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था, तब भाषाविज्ञानी एवं शिक्षाविद् डॉ. श्रीवास्तव ने बुंदेली के संरक्षण और उसके साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों ने बुंदेली भाषा और संस्कृति को नई पहचान दिलाने का काम किया।यह विचार गुंजन कला सदन एवं नगर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा शहीद स्मारक भवन में आयोजित डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव की 110वीं जयंती ‘बुंदेली दिवस’ समारोह में अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए।समारोह में दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, विधायक अभिलाष पांडे, संदीप जैन, संस्था के संरक्षक अजय विश्नोई एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. आनंद तिवारी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। गौरीशंकर केसरवानी, नरेंद्र जैन ‘एनसी’, गुरवचन सिंह चौपरा, लायन राजीव अग्रवाल, जादूगर एस.के. निगम, श्याम चौदहा, चमन श्रीवास्तव, अजय अग्रवाल, अभय जैन, हिमांशु तिवारी, सुनील श्रीवास्तव, विवेक सोनी एवं विक्रम परवार ने अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों ने डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।अतिथियों का स्वागत लायन नरेंद्र जैन, विजय जायसवाल, डॉ. रजनीश गर्ग, डॉ. प्रकाश दुबे, राजीव गुप्ता, अभिजीत राय, विमला एवं ममता श्रीवास्तव, भारती साहा तथा रेखा सहाने ने मोतियों की माला एवं पगड़ी पहनाकर किया।

नृत्य नाटिका ने बांधा समांं

समारोह के दौरान प्रभा विश्वकर्मा ‘शील’, तरुणा खरे एवं डॉ. दीपक शुक्ला की पुस्तकों का विमोचन किया गया। वहीं डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव द्वारा रचित खंडकाव्य ‘वीरांगना रानी दुर्गावती’ पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। नृत्य नाटिका का निर्देशन मोती शिवहरे ने किया, जबकि पं. रुद्रदत्त ने स्वर एवं संगीत से प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।

विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों का सम्मान

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक रितेश कुमार विश्वकर्मा, डॉ. दीपक शुक्ला, डॉ. शिव कुमार व्यास, आईपीएस संपत उपाध्याय, नरसिंह पीठाधीश्वर नरसिंह देवाचार्य, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष एडवोकेट मनीष मिश्रा, सुनील फाटक, अर्पणा पाठक, डॉ. रैना तिवारी, पत्रकार राजेंद्र शर्मा, शैलेंद्र सिंह ठाकुर, जयेश सिंह राठौर, डॉ. रजनीत जैन, शैलेश जैन आदिनाथ, वर्षा सरावगी, वरिष्ठ पत्रकार सच्चिदानंद शेकटकर, प्रेम अग्रवाल ‘पिंकी’, सुभाष जायसवाल, संजय अरोरा, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव असीम त्रिवेदी, प्रशांत साहू एवं अंकिता गिनारा शामिल रहे।

सम्मान समारोह में राजेंद्र टहनगुरिया, सुरेश सराफ, आलोक पाठक, रमाकांत गौतम, इंजीनियर प्रदीप जैन, नवनीत जैन, बाबा तिवारी, रचना त्रिवेदी, लायन उमेश जैन, नवनीत श्रीवास्तव, आर.के. तिवारी, संतोष नेमा, राजेश गुप्ता, पं. कामता तिवारी, बसंत सोनी, अमित अग्रवाल, केशव जायसवाल, गुरवचन सिंह, एडवोकेट अशोक तिवारी, हेमंत अरोरा, विनोद यादव, महेश, विजय, संजय पुरसवानी, सुमेश सराफ एवं कौशल यादव ने सम्मान किया।

आशिता और नताशा बनीं ‘नृत्यश्री’

सरदार एच.एस. चौपरा स्मृति बुंदेली नृत्यश्री प्रतियोगिता के सीनियर ग्रुप में आशिता कुमार एवं नताशा केसर को ‘नृत्यश्री अलंकरण’ प्रदान किया गया। वहीं आरोही चौरसिया को ‘उप नृत्यश्री अलंकरण’ से सम्मानित किया गया।नृत्य गुरु सारंग शिवहरे एवं अंकिता गिनारा को श्रीमती लता तिवारी स्मृति नगद राशि, शाल, श्रीफल एवं साफा पहनाकर अभिषेक अग्रवाल ने सम्मानित किया।कार्यक्रम का संचालन राजेश पाठक ‘प्रवीण’ ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विक्रम परवार ने किया।