जबलपुर, । श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ, सिविक सेंटर मढ़ाताल में चल रहे श्री शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ एवं असंख्य रुद्री निर्माण (पार्थिव शिवलिंग) के क्रम में सोमवार को भगवती का हिंडोला पूजन, भगवान हरिहरेश्वर महादेव एवं पार्थिव शिवलिंग का महारुद्राभिषेक तथा बिल्वपत्र अर्चन किया गया।कथा व्यास पूज्य ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि दस महाविद्याएं समस्त ब्रह्मांड की चेतना और ज्ञान का प्रतीक हैं। दस महाविद्याएं देवी पार्वती के दस स्वरूप मानी गई हैं। इन्हें उनकी प्रकृति और गुणों के आधार पर कालीकुल और श्रीकुल दो वर्गों में विभाजित किया गया है।उन्होंने बताया कि कालीकुल में उग्र एवं विनाशकारी स्वरूप वाली देवियां—काली, तारा, छिन्नमस्ता और धूमावती आदि शामिल हैं, जबकि श्रीकुल में सौम्य एवं रचनात्मक स्वरूप वाली त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगलामुखी, मातंगी और कमला आदि देवियों की उपासना की जाती है। साधक अपनी रुचि और भक्ति के अनुसार किसी एक कुल की साधना कर सकता है।ब्रह्मचारी चैतन्यानंद ने कहा कि दस महाविद्याओं की उपासना से साधक को जीवन में आध्यात्मिक उन्नति के साथ भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।शिव महापुराण कथा के दौरान आचार्य राजेंद्र शास्त्री, जविप्र अध्यक्ष संदीप जैन, श्याम नीता चौदाहा, शोभित समैया, वर्षा समैया, सिद्धार्थ समैया, नागेंद्र जैन, नीता पटेल, सुरेश एवं सरिता कुरेले, अन्नपूर्णा नायकर, गोविंद एवं प्रीति साहू, अमित एवं प्रतीक्षा सिंह, राधा शुक्ला, ऋचा मिश्रा, मनोज सेन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।