जबलपुर। बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा में पूज्य ब्रह्मचारी चैतन्यानंद जी ने भगवान शिव की आराधना, पार्थिव शिवलिंग, रुद्राक्ष, भस्म, बिल्वपत्र एवं शिवमहाभिषेक की महिमा का वर्णन किया।उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्राणी को श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का पूजन और अभिषेक करना चाहिए। सच्ची आराधना से मनुष्य को जीवन के बड़े से बड़े संकटों से मुक्ति मिलती है और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा ही उनके दर्शन का मार्ग प्रशस्त करती है।ब्रह्मचारी जी ने सती प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव की लीलाओं के प्रति भ्रम के कारण सती को देह त्यागना पड़ा। अपनी भूल का बोध होने पर उन्होंने अंतिम समय में भगवान शिव के चरणों का ध्यान किया और शिवलोक को प्राप्त हुईं। भगवान शिव के आशीर्वाद से उन्होंने अगले जन्म में राजा हिमाचल और रानी मैना के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। यह उनकी अटूट श्रद्धा और भक्ति का परिणाम था। उन्होंने कहा कि श्रद्धा ही जगदंबा पार्वती का स्वरूप है।कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर मधु यादव, श्याम, नीता चौधरी, वर्षा साहू, नीता पटेल, प्रीति अग्रवाल, रिचा मिश्रा, राधा शुक्ला, नेहा गुप्ता, आराध्या चौकसे, अर्पित वर्मा, मनोज सेन सहित अन्य भक्तों ने कथा का श्रवण किया।