मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की  घोषणा पर एनएसयूआई कार्यकर्ता गिरफ्तार

जबलपुर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के  26 अप्रैल रविवार को जबलपुर आगमन के अवसर पर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता, प्रशासनिक विफलताओं और छात्र हितों की लगातार उपेक्षा के विरोध में एनएसयूआई द्वारा काले झंडे दिखाकर लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने की घोषणा की गई थी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई छात्र नेता अनुराग शुक्ला करने वाले थे, किंतु कार्यक्रम से पूर्व ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें उनके निवास पर पहुंचकर बाहर निकलने से रोक दिया। इस कार्रवाई को लेकर छात्र संगठन ने तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में लंबे समय से अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है और इसकी सबसे बड़ी वजह शीर्ष प्रशासन की अक्षमता है। कुलगुरु की नियुक्ति स्वयं गंभीर विवादों में घिरी हुई है तथा यह मामला  उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश में विचाराधीन है। इसी अक्षमता के चलते विश्वविद्यालय का संपूर्ण अकादमिक कैलेंडर ध्वस्त हो चुका है। समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं हो रहीं, परिणाम महीनों तक लंबित पड़े हैं, डिग्री एवं अंकसूचियों के लिए छात्र लगातार भटक रहे हैं। हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन पर विधानसभा में गलत जानकारी देने तक के आरोप लगे हैं, जिसके बाद शासन स्तर पर जवाब-तलब की स्थिति बनी। छात्रों के लिए प्रशासन दो वर्षों में कंप्यूटर लैपटॉप डेस्कटॉप आदि कोइ भी वस्तु उपलब्ध नहीं करवा पाया है। विश्वविद्यालय में सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है और कुलगुरु महोदय विश्वविद्यालय में बचत का डंका पीट रहे हैं। सात हजार से अधिक विद्यार्थियों के परिणाम लंबित रहने, कार्यपरिषद की बैठकों में हंगामा होने, पीएम ऊषा के तहत राशि को खर्च न कर पाने से, विभागों में समन्वय के अभाव तथा प्रशासनिक निर्णयहीनता ने विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचाया है। विश्वविद्यालय परिसर में बार-बार उभर रहे छात्र असंतोष से स्पष्ट है कि प्रशासन छात्र समस्याओं के समाधान में पूर्णतः विफल रहा है।
एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि विश्वविद्यालय को पारदर्शी सक्षम और छात्रहितैषी नेतृत्व दिया जाए, तत्काल शैक्षणिक व्यवस्था बहाल की जाए, लंबित परीक्षाओं एवं परिणामों की समयबद्ध कार्ययोजना जारी की जाए, विद्यार्थियों को डिग्री-अंकसूची शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, लंबित कार्यों के विरुद्ध प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध को पुलिस बल से दबाया जा सकता है, समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि विश्वविद्यालय की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो छात्र आंदोलन और व्यापक रूप से किया जाएगा।