सागर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की सागर स्थित 8 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने प्रतिकूल मौसम, आंधी-तूफान तथा प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी उल्लेखनीय विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया है। इन लाइनों पर पिछले लगभग चार वर्षों (करीब 1500 दिनों) से एक भी ब्रेकडाउन दर्ज नहीं हुआ है। यह उपलब्धि ऐसे समय में प्राप्त हुई है जब इस अवधि में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कई बार तेज हवाएं, आंधी, वर्षा एवं अन्य प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियाँ सामने आईं, किंतु इन ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन पूर्णतः स्थिर एवं निर्बाध बना रहा।
सागर की इन 8 ट्रांसमिशन लाइनों सहित प्रदेशभर में एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनें भी विगत चार वर्षों से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा अनुरक्षण कार्य में संलग्न आउटसोर्स कर्मियों की सतत निगरानी, तकनीकी दक्षता एवं समर्पित कार्यप्रणाली का परिणाम मानी जा रही है।
सागर क्षेत्र में यह उपलब्धि प्राप्त करने वाली प्रमुख लाइनों में 400 केवी सागर-बीना (पावरग्रिड) लाइन, 400 केवी सागर-सतना (पावरग्रिड) लाइन, 132 केवी सागर-गौरझामर के दो सर्किट, 132 केवी सागर-राहतगढ़ लाइन, 132 केवी सागर-बंडा लाइन तथा 132 केवी सागर इंटरकनेक्टर के दो सर्किट शामिल हैं। इन सभी ट्रांसमिशन लाइनों ने पिछले लगभग 1500 दिनों से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक विद्युत पारेषण कर उच्च स्तरीय विश्वसनीयता स्थापित की है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाए रखने के लिए एमपी ट्रांसको द्वारा थर्मो-विजन निरीक्षण, ड्रोन सर्विलांस, एससीएडीए आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन कंडीशन मॉनिटरिंग तथा समयबद्ध निवारक अनुरक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही नियमित लाइन पेट्रोलिंग, प्री-मानसून मेंटेनेंस, लाइन कॉरिडोर प्रबंधन, टावर एवं फाउंडेशन निरीक्षण तथा वृक्षों की छंटाई जैसे कार्यों के माध्यम से संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाता है।आधुनिक तकनीक, सुनियोजित मेंटेनेंस व्यवस्था एवं मैदानी स्तर पर सतत निगरानी के परिणामस्वरूप प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की विश्वसनीयता निरंतर सुदृढ़ हो रही है। सागर की इन ट्रांसमिशन लाइनों का यह रिकॉर्ड प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि आंधी-तूफान, अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद प्रदेश की पारेषण व्यवस्था मजबूती एवं स्थिरता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।