जबलपुर। त्योहारों का मौसम आने से पहले ही बाजार ने आम आदमी की जेब का त्योहार मना दिया है। शक्कर 70 रुपए किलो, प्याज 40 रुपए किलो और आलू 35 रुपए किलो पहुंच गए हैं। हालत यह है कि अब ऐसी कोई सामान्य सब्जी नजर नहीं आ रही, जो 60 रुपए किलो से कम में मिल जाए। गेहूं-चावल के दाम में भी 2-3 किलो रुपये की बढ़ोतरी ने रसोई का बजट और बिगाड़ दिया है। सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक लहजे में लोग टीका टिप्पणी कर रहे है| एक फोटो तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें लिखा है ”पुराने भाव अब नहीं रहे”, और तस्वीर पर माला चढ़ी हुई है| इस फोटो का देखकर लोग फेसबुक व सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं|
महंगाई का आलम यह है कि रसोई में चूल्हा जलाने से पहले गृहिणियों को कैलकुलेटर जलाना पड़ रहा है। त्योहारों पर घर में मिठास घोलने के लिए खरीदी जाने वाली शक्कर ही इतनी महंगी हो गई है कि मिठाई बनाने से पहले बजट का हिसाब लगाना पड़ रहा है। प्याज काटने पर आंखों से आंसू निकलते थे, अब उसका भाव देखकर ही आंखें नम हो रही हैं।
सब्जियों के दाम भी आम आदमी की पहुंच से ऊपर होते जा रहे हैं। आलू, जिसे कभी गरीब की सब्जी कहा जाता था, वह भी 35 रुपए किलो पहुंच गया है। वहीं अधिकांश हरी सब्जियों के दाम 60 रुपए किलो या उससे ऊपर चल रहे हैं। ऐसे में त्योहार पर मेहमानों की आवभगत और परिवार की जरूरतें पूरी करना लोगों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
महंगाई का गणित कुछ ऐसा है कि थैला वही है, लेकिन उसमें आने वाला सामान लगातार कम होता जा रहा है। बाजार से खाली हाथ लौटना संभव नहीं और पूरा थैला भरना जेब के लिए भारी पड़ रहा है। त्योहार सिर पर हैं, ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि जरूरी खाद्य सामग्री के दामों पर जल्द लगाम लगेगी, वरना इस बार त्योहार की मिठास बाजार के भाव में ही फंसकर रह जाएगी।