रिश्तेदारों के खातों तक पहुंची लोकायुक्त की जांच, सुभाष शर्मा की बेनामी संपत्तियों का खुलेगा राज

जबलपुर। सिवनी के क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी सुभाष शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की जांच अब दूसरे स्तर पर पहुंच गई है। पत्नी शीला शर्मा के साथ ठिकानों पर हुई छापेमारी में प्रारंभिक तौर पर आय से 543 प्रतिशत अधिक संपत्ति सामने आने के बाद अब जांच की दिशा रिश्तेदारों की ओर मुड़ गई है। लोकायुक्त को ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनसे आशंका है कि शर्मा ने अपनी पत्नी के अलावा करीबी रिश्तेदारों के नाम का इस्तेमाल कर भी संपत्तियां अर्जित की हैं।

जांच टीम अब संबंधित रिश्तेदारों के बैंक खातों, जमीनों के दस्तावेज और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांच अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि कहीं सुभाष शर्मा की आय से अर्जित रकम को रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियों में तो नहीं लगाया गया। यदि दस्तावेजी जांच में इसकी पुष्टि होती है तो प्रकरण में संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व और धन के स्रोत को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

6 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का हिसाब

लोकायुक्त की प्रारंभिक पड़ताल में सुभाष शर्मा और उनकी पत्नी के नाम से 6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। इसमें मकान, दुकान, कृषि भूमि और विभिन्न स्थानों पर स्थित प्लॉट शामिल बताए जा रहे हैं। अंबेडकर कॉलोनी स्थित आलीशान मकान का मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। संपत्ति के बाजार मूल्य और दस्तावेजों में दर्ज कीमत के बीच अंतर की भी जांच की जाएगी।

12 बैंक खातों पर टिकी नजर

छापे और दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान लोकायुक्त टीम को सुभाष शर्मा और उनकी पत्नी के नाम से करीब 12 बैंक खातों की जानकारी मिली है। अब इन खातों में जमा रकम, निकासी, बड़े वित्तीय लेन-देन और संपत्ति खरीद से जुड़े भुगतानों की जांच की जाएगी। बैंक से पूरा रिकॉर्ड मिलने के बाद यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संपत्तियों की खरीद में रकम कहां से आई और किन खातों के माध्यम से उसका भुगतान किया गया।

रिश्तेदारों के नाम पर निवेश की आशंका

जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लोकायुक्त अब उन रिश्तेदारों की भी जानकारी जुटा रहा है, जिनके नाम पर जमीन या दूसरी संपत्तियां होने की आशंका है। टीम राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के जरिए यह मिलान कर रही है कि संबंधित लोगों की आय और आर्थिक क्षमता के अनुपात में उनके नाम पर संपत्ति कैसे अर्जित हुई।

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या इन संपत्तियों में वास्तविक निवेश सुभाष शर्मा की रकम का था और सिर्फ नाम किसी दूसरे व्यक्ति का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के बाद ही सामने आएगा।

पाटन से करमेटा तक संपत्तियों का ब्योरा जुटाया

लोकायुक्त टीम ने पाटन, ग्राम लोहारी, मौजा गोहलपुर, करमेटा और अंबेडकर कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर स्थित संपत्तियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। टीम जमीनों के दस्तावेज, रजिस्ट्री, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की संपत्ति का विवरण एकत्र कर रही है।

जांच का दायरा बढ़ा, कई सवालों के जवाब बाकी

सुभाष शर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। लोकायुक्त डीएसपी रेखा प्रजापति और नीतू त्रिपाठी के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें मामले की जांच कर रही हैं।
अब जांच का अगला चरण बैंक खातों और राजस्व रिकॉर्ड से सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा। किसके नाम पर कितनी संपत्ति है, संपत्ति खरीदने के लिए रकम कहां से आई और क्या किसी अन्य के नाम पर खरीदी गई संपत्ति का वास्तविक संबंध सुभाष शर्मा से है—इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे। फिलहाल लोकायुक्त की पड़ताल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।