मूंग उपार्जन नीति पर किसानों का गुस्सा,भारत कृषक समाज ने उठाए सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग

जबलपुर। मूंग उपार्जन व्यवस्था को लेकर जिले के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भारत कृषक समाज ने आरोप लगाया है कि सरकार की सीमित खरीदी नीति, समय पर गिरदावरी नहीं होने और खरीदी केंद्रों में देरी के कारण किसान भारी आर्थिक नुकसान उठाने को मजबूर हैं। संगठन ने प्रशासन और सरकार से पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।संगठन के अनुसार शासन ने जबलपुर जिले के लिए मूंग की उत्पादकता 5.81 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की है, जबकि किसानों के अनुसार वास्तविक औसत उत्पादन करीब 8 क्विंटल प्रति एकड़ है। सरकार द्वारा निर्धारित उत्पादकता की 25 प्रतिशत मात्रा यानी लगभग 1.45 से 1.48 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी की घोषणा की गई है। ऐसे में किसान को शेष करीब 4.50 क्विंटल मूंग खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

भारत कृषक समाज का कहना है कि मूंग का समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि मंडियों में वर्तमान में मूंग का मॉडल भाव करीब 6500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इस अंतर के कारण किसानों को 2200 से 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन के मुताबिक शेष 4.50 क्विंटल उपज पर करीब 2500 रुपए प्रति क्विंटल के नुकसान के हिसाब से किसान को लगभग 11,250 रुपए प्रति एकड़ तक का घाटा सहना पड़ेगा।

गिरदावरी में देरी से हजारों किसान पंजीयन से वंचित

संगठन ने आरोप लगाया कि मूंग पंजीयन की अंतिम तिथि 15 जून 2026 थी, लेकिन समय पर गिरदावरी पूरी नहीं होने से बड़ी संख्या में किसान पंजीयन नहीं करा सके। जबलपुर जिले में अंतिम तिथि तक करीब 8500 किसानों ने ही पंजीयन कराया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधा बताया जा रहा है।भारत कृषक समाज ने कहा कि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने भी स्वीकार किया था कि इस वर्ष जिले में लगभग आधे क्षेत्र में ही मूंग की गिरदावरी हो पाई थी और अंतिम तिथि तक बड़ी मात्रा में गिरदावरी शेष थी। जबकि जिले में इस वर्ष करीब 53 हजार एकड़ क्षेत्र में मूंग की बोनी हुई है।

खरीदी केंद्र शुरू नहीं होने से किसान परेशान

मूंग खरीदी की शुरुआत 1 जुलाई से प्रस्तावित थी। जबलपुर जिले में 10 खरीदी केंद्र निर्धारित किए गए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी केंद्र पर खरीदी शुरू नहीं होने का आरोप संगठन ने लगाया है। इसके चलते किसान मजबूरी में मंडियों में कम दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं।

पंजीयन का एक और मौका देने की मांग

भारत कृषक समाज ने सरकार से मांग की है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण पंजीयन से वंचित किसानों को एक और अवसर दिया जाए। संगठन ने वास्तविक उत्पादन के आधार पर उत्पादकता तय करने और किसानों की शत-प्रतिशत मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग रखी है।

संगठन के इंजी. केके अग्रवाल, जेआर गायकवाड़, रूपेंद्र पटेल, सुभाष चंद्रा, प्रमोद मरवाहा, रामगोपाल पटेल, रामकिशन पटेल, अविनाश राय, सीएल शर्मा, ठाकुर हरनारायण सिंह, डॉ. प्रकाश दुबे, सुशील जैन, रामेश्वर अवस्थी, संजय जैन, अनिल चिले, मनीष सोनी सहित अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।संगठन ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीति से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है और समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो इसका असर आगामी खरीफ सीजन पर भी पड़ सकता है।