शहीदों की वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों को मिलेगा हक, कैंट बाजारों की 25% दुकानें होंगी आरक्षित

जबलपुर। छावनी क्षेत्र के सार्वजनिक बाजारों में अब सामाजिक न्याय और सैनिक सम्मान की नई पहल देखने को मिलेगी। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत कैंट बोर्ड के सार्वजनिक बाजारों में उपलब्ध दुकानों का 25 प्रतिशत हिस्सा पूर्व सैनिकों तथा शहीद सैनिकों की पत्नियों के लिए आरक्षित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले आम नागरिकों और व्यापारियों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
केंद्र सरकार ने 10 जून 2026 को कैंटोनमेंट बोर्ड सार्वजनिक बाजार दुकान आरक्षण प्रारूप नियम-2026 अधिसूचित किए हैं। इसके अनुसार थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सेवानिवृत्त सैनिकों एवं शहीदों की वीरांगनाओं को दुकानों के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।
कैंट बोर्ड प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नियम का प्रभाव वर्तमान में संचालित दुकानों पर नहीं पड़ेगा। यह व्यवस्था केवल भविष्य में निर्मित होने वाली अथवा खाली होने वाली दुकानों पर लागू होगी। शेष 75 प्रतिशत दुकानों का आवंटन स्थानीय निकायों की प्रचलित नियमावली के आधार पर किया जाएगा।
दो बार विज्ञापन के बाद ही बदलेगा आरक्षण
नियमों के अनुसार यदि आरक्षित श्रेणी में पर्याप्त आवेदन प्राप्त नहीं होते हैं, तो संबंधित दुकानों को सामान्य वर्ग में परिवर्तित करने से पहले कम से कम दो बार विशेष विज्ञापन जारी कर पात्र आवेदकों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इससे आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी।
30 दिन में दे सकते हैं सुझाव और आपत्तियां
कैंट बोर्ड ने 18 जून को जारी सार्वजनिक सूचना में नागरिकों, व्यापारियों और हितधारकों से इस नई नीति पर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। इच्छुक व्यक्ति सूचना के प्रकाशन से 30 दिनों के भीतर अपनी लिखित राय या आपत्ति छावनी कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।