2 साल में 4 पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट की घटनाएं, उपभोक्ता मंच ने जांच आयोग के समक्ष दायर की याचिका


जबलपुर। पटाखा फैक्ट्रियों में लगातारा हो रही विस्फोट की घटना पर चिंता जाहिर करते हुए नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के विभिन्न आदेशों को हवाला देकर देवास पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट कांड की जांच के लिए गठित जांच आयोग के समक्ष याचिका प्रस्तुत की| याचिका में मांग की गई है कि लगातार हो रहे हादसों में नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई आवश्यक है| याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में पिछले 2 वर्षों में पटाखा फैक्ट्रियों में हादसों की 4 घटनायें हुई। हरदा, मऊ, मुरैना और अब देवास में। लगातार हो रहीं ऐसी घटनाओं के लिये सख्त कार्यवाही की जाना चाहिये।
यह प्रार्थना करते हुये डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने शुक्रवार को टोककला (जिला देवास) के पटाखा फैक्ट्री में हुये हादसे की जांच आयोग के चेयरमेन न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े को याचिका प्रस्तुत की। याचिका में सुप्रीम कोर्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी विभिन्न आदेशों का हवाला देकर बताया कि इन आदेशों की पूर्णतः अनदेखी की गई है।

थानेदार पर अवमानना कार्रवाई की मांग………….

डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने बताया कि उनके द्वारा दायर याचिका पर एनजीटी ने 12 मई को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि न्यायालयों के आदेशों का पालन नहीं करने पर संबंधित पुलिस थानेदार पर अवमानना मुकदमा दर्ज किया जाये। इसी आदेश के 2 दिन बाद ही देवास में 14 मई को हादसा हुआ। फिर भी शासन चुप बैठा है।

देवास के पीड़ितों को भी मुआवजा दिया जाए…………

याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट प्रभात यादव ने बताया कि हरदा घटना की याचिका में एनजीटी ने निर्देश दिये थे कि पीड़ितों को 20 लाख की राशि दी जाये। इसी के तर्ज पर देवास घटना के पीड़ितों को भी पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशियां प्रदान की जायें।
पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस एक्ट के तहत भी पीड़ितों को राहत राशियां देने का प्रावधान है। लिहाजा देवास घटना जांच आयोग इस संबंध में निर्देश जारी करे।