पीडियाट्रिक सर्जन डॉ.रैना का महाप्रयाण, देहदान कर पेश की सेवा की सर्वोच्च मिसाल


जबलपुर। चिकित्सा जगत में ‘मरीज प्रथम’ के संकल्प को जीने वाले विख्यात पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. बी.के. रैना का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया, लेकिन उनका जीवन और उनके अंतिम संस्कार की गरिमा समाज के लिए युगों तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ. रैना ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी मानवता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को दान कर समर्पण की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो विरले ही देखने को मिलती है।
उनके इस महान संकल्प और समाज के प्रति नि:स्वार्थ सेवा को देखते हुए उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस भावुक क्षण पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. रैना का व्यक्तित्व समाज को सदैव एक नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने देहदान जैसे कठिन और पुनीत संकल्प को पूर्ण कर खुद को अमर कर लिया है।
डॉ. रैना के अंतिम सफर में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, डॉ. प्रदीप कसार, अधीक्षक अरविंद शर्मा और डॉ. राजेश तिवारी सहित चिकित्सा जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। उनके सहयोगियों ने उन्हें एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में याद किया जिन्होंने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अपना जीवन खपा दिया, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी आने वाली पीढ़ी के चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन का मार्ग प्रशस्त किया।