जबलपुर। मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने की इच्छा को ग्राम पोंडा, तहसील मझौली निवासी कैलाश दास चौधरी ने अपने जीवनकाल में ही संकल्प में बदल दिया था। संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने देहदान का निर्णय लिया था। निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में उनका देहदान कराया।कैलाश दास चौधरी के बड़े बेटे अनिल दास सहित उनके चारों बेटों और पत्नी की सहमति से देहदान की प्रक्रिया पूरी हुई। भावुक माहौल के बीच परिवार ने उनके अंतिम संकल्प को पूरा कर समाज के सामने मानवसेवा की मिसाल पेश की।
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना के साथ डॉ. राजेंद्र कुशवाहा और डॉ. एन.एल. अग्रवाल ने कैलाश दास चौधरी के देहदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि देहदान चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे निर्णय समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही मानवहित की भावना को भी मजबूत करते हैं।
गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मान
कैलाश दास चौधरी के सेवाभावी संकल्प को प्रशासन की ओर से भी सम्मान दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और देहदान के प्रेरणादायक निर्णय के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।
देहदान के माध्यम से मृत्यु के बाद शरीर का उपयोग चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए किया जा सकता है। इससे चिकित्सा विद्यार्थियों और भावी चिकित्सकों को मानव शरीर की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।कैलाश दास चौधरी का निर्णय यह संदेश देता है कि जीवन समाप्त होने के बाद भी मनुष्य अपने शरीर के माध्यम से समाज और चिकित्सा जगत के लिए उपयोगी योगदान दे सकता है। उनका देहदान आने वाली पीढ़ियों को मानवसेवा और देहदान के महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित करने वाला कदम है।