भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के निर्देश पर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत गठित सभी विभागों, प्रकोष्ठों और उनकी सभी स्तरों की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इस संबंध में मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने बुधवार को आदेश जारी किए हैं। इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले संगठन में व्यापक फेरबदल और नई टीम के गठन की दिशा में कांग्रेस का बड़ा कदम माना जा रहा है।आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशों और संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत यह निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस के अंतर्गत वर्षों से कार्यरत सभी विभाग, प्रकोष्ठ और जिला, शहर, ब्लॉक स्तर तक की इकाइयां स्वत: समाप्त मानी जाएंगी।
नई टीम के गठन की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अब प्रदेश संगठन को पूरी तरह नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में है। हाल के महीनों में संगठन की निष्क्रियता और कई विभागों के प्रभावी ढंग से काम नहीं करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में सभी इकाइयों को भंग कर नए चेहरों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
जिला और शहर इकाइयों में बढ़ेगी हलचल
इस फैसले का सबसे अधिक असर जिला, शहर और ब्लॉक स्तर पर दिखाई देगा। विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, संयोजक और पदाधिकारी अब पदमुक्त माने जाएंगे। नए गठन में युवाओं, महिलाओं, सामाजिक वर्गों और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे प्रदेशभर में कांग्रेस नेताओं के बीच नई जिम्मेदारियां पाने की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठ—युवा, किसान, विधि, चिकित्सा, आईटी, व्यापार, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक सहित अन्य विभागों की इकाइयां भी इस आदेश के दायरे में आ गई हैं। अब इन सभी का पुनर्गठन किया जाएगा।
आलाकमान को भेजी गई प्रति
जारी आदेश की प्रतिलिपि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को भेजी गई है।
राजनीतिक मायनेराजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कवायद है। आने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ भविष्य के विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा और नए नेतृत्व के साथ उतरना चाहती है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियों, दावेदारी और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।