बरगी जलाशय सूखा तो कीचड़ में दबी हजारों मछलियां,

जबलपुर। इस साल मानसून के धीमी गति से सक्रिय होने और बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में बारिश नहीं होने की स्थिति से  बरगी जलाशय में जलस्तर लगातार घटने से हजारों मछलियां या तो कीचड़ में दबकर मर गईं या फिर उथले पानी में फंसने के कारण शिकारीयों का आसान शिकार बन गईं। जलाशय का बड़ा हिस्सा पूरी तरह सूख जाने से जगह-जगह कीचड़ और पथरीली जमीन नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कम पानी का फायदा उठाकर कई दिनों तक दिन-रात जाल डालकर मछलियों का बड़े पैमाने पर शिकार किया गया। गत सुबह सामने आई तस्वीरों में बरगी जलाशय किसी विशाल जलाशय के बजाय एक बड़े तालाब जैसा दिखाई दिया। किनारों से पानी काफी पीछे हट चुका है और दूर-दूर तक सूखी जमीन, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहे हैं। केवल गहरे हिस्सों में ही पानी बचा है, जबकि अधिकांश क्षेत्र सूख चुका है।बरगी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जलस्तर घटने से बड़ी संख्या में मछलियां कीचड़ में फंस गईं। कई मछलियां ऑक्सीजन की कमी और पानी के अभाव में मर गईं, जबकि उथले पानी में बची मछलियां आसानी से जाल में फंसती रहीं। उनका दावा है कि इस दौरान बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मछलियों का शिकार भी हुआ।हालांकि अब मंडला और डिंडौरी की ओर से जलाशय में पानी की आवक शुरू हो गई है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ सकता है और जलाशय की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल कई स्थानों पर पानी की गहराई आधा मीटर या उससे भी कम बनी हुई है।
सूखे जलाशय को देखने उमड़ रही भीड़
जलाशय का बड़ा हिस्सा सूखने के बाद इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ पहुंच रही है। कई लोग सुरक्षा की परवाह किए बिना जलाशय के भीतर तक उतर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मौके पर सुरक्षा व्यवस्था या निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।