जबलपुर। रानी वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिर्जव (नेहरादेही) से आई रेस्क्यू के बाद बीमार उपचाराधीन बाघिन की सेहत में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। लगभग एक महिनें पहले बाघिन को गंभीर हालत में जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी के तहत संचालित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाईफ एंड फॉरेन्सिक सेंटर में उपचार के लिए लाया गया था| चिकित्सकों के मुताबिक वह अब मानसिक तनाव से काफी हद तक बाहर आ चुकी है, लेकिन उसका आक्रामक व्यवहार अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। यही वजह है कि वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ फिलहाल उसे जंगल में छोड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहते।
बाघिन का उपचार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड फॉरेंसिक सेंटर (एसडब्ल्यूएफसी) में किया जा रहा है। सेंटर की डायरेक्टर डॉ. शोभा जावरे के मुताबिक, बाघिन की शारीरिक स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन खुले जंगल में छोड़ने से पहले विशेषज्ञों द्वारा उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया जाना आवश्यक है। पिछले दो दिनों में स्वास्थ्य में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई, जिसके बाद मेडिकल टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।
रोज मिल रही सामान्य डाइट………….
विशेषज्ञों के अनुसार बाघिन अब सामान्य भोजन ले रही है। उसे प्रतिदिन करीब 5 से 6 किलो मांस दिया जा रहा है। चिकित्सकों की निगरानी में यह भी पाया गया है कि उसका गुस्सा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि वह मानसिक तनाव से उबर चुकी है, लेकिन व्यवहार में अपेक्षित बदलाव आने में अभी समय लग सकता है।
15 दिन बाद दोबारा होगा परीक्षण……………
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बाघिन की अगली स्वास्थ्य जांच 15 दिन बाद करने का निर्णय लिया है। जांच रिपोर्ट और व्यवहार के मूल्यांकन के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि उसे जंगल में छोड़ा जा सकता है या उपचार और निगरानी की अवधि बढ़ाई जाएगी। फिलहाल वन विभाग उसकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए है।