जबलपुर। शहर में आवारा श्वानों की लगातार बढ़ती संख्या अब प्रशासन और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर चलाए जा रहे नसबंदी और डॉग कैचिंग अभियान के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। शहर में करीब 50 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की मौजूदगी बताई जा रही है, जबकि हर महीने लगभग 2800 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर नसबंदी और पकड़ने की योजनाएं जमीन पर कितनी प्रभावी साबित हुई हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शहर के अस्पतालों में रोजाना 250 से ज्यादा डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 125 मामले सामने आ रहे हैं, जबकि संजीवनी अस्पताल में लगभग 50 और मेडिकल अस्पताल में 80 तक मरीज रोज पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े भी लगातार बढ़ते खतरे की पुष्टि कर रहे हैं।
स्कूल, कॉलोनियां और बाजार बने खतरे के क्षेत्र ……..
शहर के कई रिहायशी इलाकों, कॉलोनियों, बाजारों और स्कूलों के आसपास आवारा श्वानों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई दे रहे हैं। सुबह और शाम के समय स्थिति और भयावह हो जाती है। बच्चों को स्कूल भेजने में अभिभावकों को डर लग रहा है, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग भी इन हमलों का शिकार हो रहे हैं।
राहगीरों और बाइक सवारों पर अचानक हमला करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई क्षेत्रों में श्वानों के झुंड वाहन चालकों का पीछा करते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम की टीमें समय पर नहीं पहुंचतीं।
पकड़ने वाली टीमों के सामने भी चुनौती ………..
नगर निगम द्वारा समय-समय पर डॉग कैचिंग अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जानवरों को पकड़ने वाली टीमें भी श्वानों की बढ़ती संख्या के सामने बेबस नजर आ रही हैं। कई इलाकों में स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि श्वानों को पकड़ने के बाद दोबारा उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, जिससे समस्या फिर जस की तस बनी रहती है।
सूत्रों के अनुसार नसबंदी अभियान की गति भी बेहद धीमी है। शहर की तुलना में नसबंदी किए गए श्वानों की संख्या काफी कम बताई जा रही है। यही वजह है कि हर साल आवारा श्वानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
एंटी रेबीज के बाद भी मौतें बढ़ा रहीं चिंता …..
सबसे चिंताजनक बात यह है कि डॉग बाइट से जुड़े करीब 15 मामलों में एंटी रेबीज वैक्सीन लगने के बावजूद मरीजों की जान नहीं बच सकी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार देर से इलाज शुरू होने, संक्रमित कुत्तों के हमले और गंभीर घावों की वजह से खतरा बढ़ जाता है।
शहर के सबसे बड़े डॉग पार्कों में भी संक्रमित श्वानों की मौजूदगी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में रेबीज संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को सावधानी बरतने और काटने की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दे रहा है।
निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल………..
बढ़ते मामलों के बीच अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिक संगठनों का कहना है केवल कागजी अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉग बाइट रोकने के लिए बड़े स्तर पर नसबंदी, स्थायी शेल्टर, नियमित मॉनिटरिंग और संवेदनशील इलाकों में विशेष अभियान चलाने की जरूरत है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। फिलहाल शहर में आवारा श्वानों का आतंक आम लोगों के लिए सबसे बड़ी शहरी समस्याओं में से एक बनता जा रहा है।