नवीन अधिवक्ताओं को 5 साल तक मिले सरकारी स्टाइपेंड – मानव अधिकार संगठन ने सीएम से की मांग

जबलपुर। न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू करने वाले युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन ने म.प्र. सरकार से बड़ी मांग की है।
संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर मांग की है कि 1 से 5 वर्ष तक प्रैक्टिस करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर नवीन अधिवक्ताओं के लिए विशेष आर्थिक सहायता योजना शुरू की जाए। उन्हें हर साल स्टाइपेंड या अधिवक्ता राहत निधि के रूप में उचित आर्थिक मदद दी जाए। संगठन का कहना है कि वकालत शुरू करने के शुरुआती सालों में युवा अधिवक्ताओं को पर्याप्त केस नहीं मिलते। कई महीनों तक आमदनी नहीं होती, जिससे कई होनहार युवा प्रैक्टिस छोड़कर दूसरा व्यवसाय करने को मजबूर हो जाते हैं। अधिवक्ता समाज का बुद्धिजीवी वर्ग है जो संविधान और न्याय व्यवस्था को मजबूत करता है, ऐसे में सरकार का सहयोग जरूरी है। संगठन ने सुझाव दिया है कि इसके लिए आय सीमा, बार पंजीयन और प्रैक्टिस अवधि के आधार पर पात्रता तय की जाए ताकि मदद सही जरूरतमंद तक पहुंचे। यह मांग संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित सिसोदिया के मार्गदर्शन में जबलपुर अध्यक्ष डॉ. अजय वाधवानी के नेतृत्व में उठाई गई है। इस दौरान एड. भावना निगम, एड. आशीष त्रिपाठी, एड. आशुतोष चतुर्वेदी, एड. रोशन मंध्यानी, एड. अंकित मिश्रा, एड. अमित खत्री, एड. अमित शर्मा, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. अशोक मेथवानी, डॉ. कमल विश्वास, डॉ. श्रीकांत साहू, कमरुल इस्लाम खान सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।