जबलपुर । लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के अंतर्गत आगामी 02 नवम्बर को जबलपुर में होने वाली विशाल पद यात्रा में जबलपुर के हर वर्ग से नागरिक, प्रबुद्ध जन एवं आमजन बड़ी संख्या में शामिल हो, इसमें सभी की सहभागिता हो और देश के विपक्षी दलों द्वारा फैलाई जा रही अराजकता के विरोध में एकत्र होकर देश की एकता और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश दें, यह बात लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने विभिन्न संगठनों के साथ आयोजित बैठक के दौरान कही।उल्लेखनीय है कि आगामी 02 नवम्बर को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल की गरिमामयी उपस्थिति में शहीद स्मारक गोलबाजार से विशाल पद यात्रा निकाली जाएगी, इस यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में हर वर्ग से लोग शामिल हो इस हेतु मंत्री श्री सिंह ने निजी विद्यालयों, कोचिंग संचालकों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं उप प्राचार्यों, खेल संगठनों, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों के संगठनों, आग्रह फाउंडेशन, हाईकोर्ट एवं डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, कॉफी हाउस के पदाधिकारियों, आईएमए एसोसिएशन, होटल, हॉस्पिटल एसोसिएशन, बिल्डर्स एसोसिएशन, टैक्स बार एसोसिएशन, सी.ए. बार एसोसिएशन, कैट और जीतो संस्था एवं ऑटोमोबाईल एसोसिएशन, सामाजिक संगठनों, एवं पश्चिम विधानसभा के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर पदयात्रा में शामिल होने का आह्वान किया।
मंत्री श्री राकेश सिंह ने बैठकों को सम्बोधित करते हुए कहा श्री सिंह ने कहा कि लम्बे समय तक कांग्रेस ने देश में शासन किया, देश उन्नति के जिस शिखर पर होना था वहां नहीं पंहुचा बल्कि देश को आतंकवाद, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी में झोंक दिया
कांग्रेस से लेकर भाजपा सरकार तक होता रहा है SIR,
मंत्री श्री सिंह ने कहा देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल हाय तोबा मचा रहें है लेकिन यह जानना सभी के महत्वपूर्ण है कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत देश में स्वतंत्रता के बाद ही हो गई थी। निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया संचालित करता रहा है।उन्होंने कहा निर्वाचन आयोग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1952 से 1956 के बीच पहली बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई गई। उस समय केंद्र में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। इसके बाद 1957 और 1961 में भी यह प्रक्रिया हुई, तब भी केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 1965 में लाल बहादुर शास्त्री तथा 1966 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पुनरीक्षण हुआ। इसके बाद 1983-84 में इंदिरा गांधी और 1987-89 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी यह प्रक्रिया संचालित की गई। वर्ष 1992, 1993 और 1995 में पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण हुआ। वहीं वर्ष 2002 और 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन की एनडीए सरकार के समय भी SIR कराया गया। वर्ष 2004 में सत्ता परिवर्तन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और बाद में डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल का समय रहा।उन्होंने कहा वर्तमान में वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग द्वारा पुनः विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया संचालित की जा रही है और यह लोकतान्त्रिक तरीके से किया जा रहा।उन्होंने कहा विशेष गहन पुनरीक्षण किसी एक राजनीतिक दल या सरकार की नई पहल नहीं है। यह भारतीय निर्वाचन व्यवस्था की पुरानी प्रक्रिया है, जिसे अलग-अलग समय में विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग द्वारा संपन्न कराया जाता रहा है, फिर भी कांग्रेस और तथाकथित विरोधी कहा रहें है लोकतंत्र खतरे में है, जब कांग्रेस के शासन में एसआईआर हो तो सब सही पर भाजपा सरकार के शासन में हो लोकतंत्र खतरे में आ जाता है यह कांग्रेस और विपक्ष का दोहरा चरित्र है और यह जनता के सामने आ रहा है.श्री सिंह ने कहा पहलें देश के मुख्य चुनाव आयुक्त का चुनाव सिर्फ प्रधानमंत्री तय करते थे किन्तु भाजपा की सरकार आने के बाद एक कमेटी बनी जिसने नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहें किन्तु कॉंग्रेस और तथाकथित कॉकरोच पार्टी को सिर्फ विरोध करना है और ये लोग देश में अराजकता फैलाने का कार्य कर रहे है पर भाजपा का नेतृत्व, कार्यकर्ता और सामाजिक जन लोकतंत्र की रक्षा हेतु सड़क पर उतरकर पदयात्रा के माध्यम से जनता से संवाद करेगा आगामी 2 नवम्बर को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल सहित वरिष्ठ नेता जबलपुर में लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान अंतर्गत पद यात्रा करेंगे और इस पद यात्रा आप भी अपने साथियो के साथ बड़ी संख्या शामिल हो।बैठकों में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।