सेतुबंध रामेश्वर पूजन के बाद गढ़ा रामलीला में गूंजा अंगद का सिंहनाद

जबलपुर श्री रामलीला समिति गढ़ा जबालीपुरम के सिद्ध मंच पर लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव की स्थापना कर पूजन-अर्चन किया तथा समुद्र पर सेतु निर्माण का संकल्प लिया। इसके उपरांत अतिथियों ने जनकल्याण की कामना से भगवान रामेश्वर का पूजन किया।
मुख्य पूजनकर्ता श्रीमती स्मृति भार्गव, अध्यक्ष, नयागांव सोसाइटी एवं श्रीमती रेखा खम्परिया, प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी तथा विशिष्ट अतिथि श्री सतीश पूजा कोष्टा, हनुमान चौक विजय नगर ने भगवान शंकर का पूजन-अर्चन किया।
समिति के संचालक पं. अशोक मनोध्याय, अध्यक्ष एवं निर्देशक राजेश मिश्रा, महामंत्री एडवोकेट अरुण दीक्षित सहित उमाशंकर मिश्र, लोकराम कोरी, देवेन्द्र मनोध्या,दीपक कोष्टा, विनायक तिवारी,रमाशंकर कटारे, राजेंद्र प्यासी, हरीश मनोध्याय, अशोक बघेल ‘दादा भाई’, संजय नेमा,संजय तिवारी चेरीताल,भोलाराम खत्री,विश्व हिन्दू परिषद के मुन्ना पांडे,राजेश नेमा, डॉ. नीना भूपेंद्र उपाध्याय, हनुमंत सिंह रघुवंशी, प्रमोद तिवारी एवं इंदुलता प्यासी ने अतिथियों का तिलक-वंदन कर मोतीमाला पहनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर समिति द्वारा साहित्य जगत के प्रतिष्ठित बुंदेली राष्ट्रकवि राज सागरी एवं अंतरराष्ट्रीय संस्था “प्रसंग” के संस्थापक सम्माननीय श्री इंजि. विनोद नयन का शाल, श्रीफल एवं मोतीमाला पहनाकर अभिनंदन किया गया।
साथ ही गढ़ा वार्ड के पार्षद मनीष पटेल,मारुती सेल्यूशन के विपुल नेमा, डॉक्टर रचना शर्मा,सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री श्याम सोनी एवं सचिव दीपक सोनी का भी समिति द्वारा सम्मान किया गया।
रामेश्वर पूजन में निर्देशक राजेश मिश्रा, सह-निर्देशक मोती शिवहरे, मुकेश मिश्रा, नीलेश चौबे, विनायक तिवारी, श्रीमती विद्या केवट, पूजा कोष्टा, नीरज दुबे, गणपत कोष्टा, कैलाश नेमा, अजय तिवारी, विजय नेमा, पंकज अवस्थी, राकेश मिश्रा सहित समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। रामेश्वर पूजन की संपूर्ण व्यवस्था परंपरागत रूप से श्री तोड़र सिंह द्वारा की जाती है।
अंगद की चुनौती से गूंजा रावण दरबार
रामेश्वर पूजन के उपरांत रावण-अंगद संवाद की रोमांचक लीला का मंचन हुआ। प्रभु श्रीराम के दूत बनकर लंका पहुंचे अंगद ने रावण के दरबार में निर्भीकता से लंकापति को ललकारा और लंका के वीर योद्धाओं को अपना पैर हिलाने की चुनौती दी। अंगद ने कहा कि यदि कोई वीर उनका पैर तिल मात्र भी हिला देगा, तो वे माता सीता को यहीं छोड़कर लौट जाएंगे।
अंगद की चुनौती स्वीकार करने के लिए रावण के दरबार में एक से बढ़कर एक योद्धा आगे आए, लेकिन कोई भी अंगद का पैर नहीं हिला सका। इस प्रसंग ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। रावण के पात्र मुकेश मिश्रा एवं अंगद के पात्र नितिन पटेल के प्रभावशाली अभिनय की दर्शकों ने सराहना की।सोमवार दिनांक  19 अक्टूबर 2026 को सिद्ध मंच पर लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण वध एवं मेघनाद वध की रोचक लीलाओं का मंचन किया जाएगा। समिति ने समस्त श्रद्धालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्रीराम की दिव्य लीलाओं का आनंद लेने की अपील की है।