जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जबलपुर प्रवास के दौरान रविवार को सहज और आत्मीय अंदाज देखने को मिला। मंडला में तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सड़क मार्ग से जबलपुर लौट रहे मुख्यमंत्री का काफिला बरेला में अचानक रुक गया। मुख्यमंत्री ने शारदा माता मंदिर के सामने सड़क किनारे लगी अग्रवाल होटल पर पहुंचकर आम लोगों के बीच बैठकर चाय पी।
दरअसल, मुख्यमंत्री के सड़क मार्ग से जबलपुर आने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनके स्वागत के लिए शारदा माता मंदिर के सामने जुट गए थे। लोगों को देखकर मुख्यमंत्री ने अपना काफिला रुकवाया और सीधे चाय की दुकान पर पहुंच गए। उन्होंने दुकान संचालक से बातचीत की और चाय पी। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने चाय के पैसे भी स्वयं चुकाए।
इस दौरान भाजपा जबलपुर नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और भाजपा दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप रजक भी मौजूद रहे।
सास-बहू के ढाबे पर भी रुका काफिला
इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला बरेला स्थित सनराइज फैमिली ढाबे पर भी रुका। यहां भाजपा जिला अध्यक्ष ग्रामीण राजकुमार पटेल और विधायक नीरज सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। भाजपा जिला महामंत्री कृष्ण शेखर सिंह भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने यहां भी चाय पी और ढाबा संचालक आरती दुबे तथा उनकी बहू सुरभि दुबे से मुलाकात कर परिवार के सदस्यों के हालचाल जाने। सास-बहू द्वारा मिलकर संचालित किए जा रहे ढाबे के बारे में भी उन्होंने जानकारी ली।
बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे युवा को किया सम्मानित
इसी दौरान मुख्यमंत्री की नजर बरेला के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देने वाले युवा मयंक साहू पर पड़ी। मुख्यमंत्री ने मयंक के इस कार्य की सराहना करते हुए उसे शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा के लिए किए जा रहे उसके प्रयास को सराहामुख्यमंत्री के अचानक सड़क किनारे रुकने और आम लोगों के बीच चाय पीने के इस अंदाज ने वहां मौजूद लोगों को भी उत्साहित कर दिया। कुछ देर रुकने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला डुमना विमानतल की ओर रवाना हो गया।