गुरंदी बाजार मै कचरे का अंबार, दुर्गंध से व्यापारी परेशान

जबलपुर। शहर के सबसे पुराने और प्रमुख बाजारों में शुमार गुरंदी बाजार इन दिनों अपनी पहचान से ज्यादा कचरे और गंदगी को लेकर चर्चा में है। बाजार के बीचों-बीच नगर निगम का अघोषित कचरा डंपिंग जोन बना हुआ है, जहां छोटी-छोटी गाड़ियां दिनभर कचरा लाकर डंप करती हैं। इसके बाद जेसीबी के जरिए कचरे को उठाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरा यहां से नियमित रूप से नहीं उठता और कई बार दो दिन तक कचरा पड़ा रहता है।

मछली मार्केट के ठीक बगल में कचरे का ढेर

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह कचरा डंपिंग प्वाइंट नवनिर्मित मछली मार्केट के ठीक बगल में बनाया गया है। मछली मार्केट का निर्माण पूरा हो चुका है, सफाई भी कराई गई है और बोर्ड भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां पूरी तरह से मछली का कारोबार शुरू नहीं हो पाया है।

मार्केट आखिर कब पूरी तरह शुरू होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी स्थानीय व्यापारियों तक को नहीं है। ऐसे में एक तरफ नया बाजार तैयार है, वहीं दूसरी तरफ उसके ठीक बगल में कचरा डंप होने से इलाके की तस्वीर सवाल खड़े कर रही है।

दुर्गंध के बीच कारोबार करने को मजबूर व्यापारी

स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक कचरा जमा होने के बाद यहां से उठने वाली दुर्गंध इतनी तेज हो जाती है कि आसपास बैठकर व्यापार करना मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों को कई बार नाक बंद करके दुकान पर बैठना पड़ता है।व्यापारियों का कहना है कि कचरे के कारण ग्राहक भी परेशान होते हैं और बाजार का माहौल लगातार खराब हो रहा है। गंदगी और दुर्गंध के चलते व्यापार पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है।

‘कहें भी तो किससे कहें?’

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो रहा। उनका कहना है कि शिकायत करने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता।

व्यापारियों का सवाल है कि यदि बाजार में ही कचरा जमा किया जाना है, तो फिर शहर में स्वच्छता व्यवस्था और स्वच्छता सर्वेक्षण के बड़े-बड़े दावों का क्या मतलब रह जाता है?

स्वच्छता सर्वेक्षण के दावों के बीच कीचड़ और कचरा

नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन और शहर को साफ-सुथरा रखने के दावे करता है, लेकिन गुरंदी बाजार की मौजूदा स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती नजर आती है।कचरे के साथ-साथ बाजार में जगह-जगह कीचड़ ही कीचड़ नजर आने की बात स्थानीय लोग बता रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर के पुराने और व्यस्त बाजारों में ही स्वच्छता व्यवस्था इस तरह चरमराई हुई है, तो स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों का वास्तविक असर जमीन पर कितना है?स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि गुरंदी बाजार को कचरा डंपिंग जोन बनाने के बजाय यहां से कचरा संग्रहण की व्यवस्था व्यवस्थित की जाए, नियमित सफाई कराई जाए और कचरे के स्थायी समाधान के साथ बाजार को दुर्गंध, कीचड़ और गंदगी से निजात दिलाई जाए।