भारत की तुलना अन्य देशों से नहीं; दुनिया को दिशा देने की जिम्मेदारी हमारी: डॉक्टर भागवत

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को आवाहन किया कि
भारत को अमेरिका, चीन या ऑस्ट्रेलिया से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी संस्कृति, मूल्यों और जरूरतों के आधार पर विकास की दिशा तय करनी चाहिए. दुनिया आज अधूरी दृष्टि के कारण संघर्ष कर रही है. इसलिए दुनिया को आगे का मार्ग दिखाने की जिम्मेदारी भारत की है. इसके लिए देश की युवा पीढ़ी को साहस, कर्मशीलता, त्याग और शौर्य के बल पर खुद को तैयार करना चाहिए.
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागपुर के ऐतिहासिक कस्तूरचंद पार्क मैदान पर नागपुर महानगरपालिका के सहयोग से ‘लोकमत’ समाचार समूह द्वारा स्थापित 200 फुट ऊंचे राष्ट्रध्वज का शनिवार सुबह डॉ. मोहन भागवत के हाथों ध्वजारोहण किया गया. इसके बाद आयोजित विशेष कार्यक्रम में ‘भारत के उज्ज्वल भविष्य में युवाओं का योगदान’ विषय पर उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन किया. ‘लोकमत मीडिया समूह के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व राज्यसभा सांसद’ डॉ. विजय दर्डा की संकल्पना से यह उपक्रम चलाया गया. इस अवसर पर डॉ. विजय दर्डा, नीता ठाकरे सहित विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां उपस्थित थीं.
भागवत ने कहा किभारत स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यह अवसर आत्मचिंतन का है. कुछ लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि भारत की स्वतंत्रता कायम नहीं रहेगी. लेकिन कई पीढ़ियों ने अपने हितों का त्याग किया, बलिदान दिया और देश के लिए काम किया. इसलिए आज हम भविष्य के बारे में सोच सकते हैं, ऐसा डॉ. भागवत ने कहा. युवा पीढ़ी देश का ‘डेमोक्रेटिक डिविडेंड’ है. इसका उचित उपयोग किया गया तो भारत विश्वगुरु बन सकता है, अन्यथा यही बड़ी आबादी भविष्य में बोझ बन सकती है. इसलिए युवाओं को केवल अपने भविष्य के बारे में नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी और देश के भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए.

भागवत ने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल नौकरी मिलना नहीं है. उद्योग-व्यवसाय में जोखिम होते हैं और उन जोखिमों का सामना करके सफलता हासिल करने का साहस युवाओं में होना चाहिए. बड़ी आबादी वाले भारत को रोजगार और विकास के बारे में अपनी जरूरतों के दृष्टिकोण से सोचना होगा. इसके लिए युवाओं को अध्ययन और नए अवसरों की तलाश करना आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि युवाओं में सपने देखने और उनके लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करने का साहस होता है. दुनिया के संघर्षों का पर्याप्त अनुभव नहीं होने के कारण उनमें आशा अधिक व्यापक होती है. इस साहस को हमेशा बनाए रखते हुए इसका उपयोग देश के निर्माण के लिए करना चाहिए. देश की प्रतिष्ठा और सुरक्षा कायम रखनी है तो इसके लिए युवाओं को ही पहल करनी चाहिए.


लोकमत के सहायक उपाध्यक्ष मतीन खान ने संचालन किया, जबकि संपादक श्रीमंत माने ने आभार व्यक्त किया

प्रगति के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत का विकास केवल भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए. त्याग, कर्मशीलता, ज्ञान और शौर्य के बाद शांति, अहिंसा और निर्मल चित्त का समन्वय किया जाए, तभी वास्तविक समृद्धि हासिल की जा सकती है. विकास करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखना आवश्यक है.
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है. यहां अलग-अलग विचार और विचारधाराएं हैं. राष्ट्रध्वज के अशोकचक्र की विभिन्न तीलियां अलग-अलग दिशाओं में जाती हैं, लेकिन वे एक ही केंद्र से निकलती हैं. उसी प्रकार विभिन्न विचार होने के बावजूद देश के हित के लिए सभी को साथ चलने की जरूरत है.


विरोध करें; लेकिन संविधान का ध्यान रखें

आरएसएस चीफ ने कहा कि
लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और विरोधी दृष्टिकोण होना स्वाभाविक है. सवाल जोरदार तरीके से उठाना, आंदोलन करना और विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है. लेकिन ऐसा करते समय संविधान और उसकी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए. हमारे कानून, संविधान, प्राचीन संस्कृति, संस्कार और शील को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान प्रत्येक व्यक्ति को रखना चाहिए. आपसी मतभेद होने के बावजूद मन में वैमनस्य पैदा नहीं होना चाहिए. देश को बड़ा बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना आवश्यक है. विविधता में एकता और सहचित्त का निर्माण करना ही तिरंगे के धम्मचक्र का संदेश है.

हम तभी वैभवशाली हैं, जब भारत वैभवशाली है

रवींद्रनाथ टैगोर की जापान यात्रा का संदर्भ देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि किसी देश का वैभव केवल व्यक्तियों के वैभव से तय नहीं होता. देश वैभवशाली होगा, तभी नागरिक सही अर्थों में वैभवशाली होंगे. इसलिए व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ राष्ट्र की उन्नति के बारे में सोचने की जरूरत है

*यह केवल ध्वज नहीं; भारत की अस्मिता और आत्मगौरव – डॉ. विजय दर्डा*

कस्तूरचंद पार्क पर स्थापित किया गया 200 फुट ऊंचा तिरंगा केवल राष्ट्रध्वज नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, आत्मगौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है. ऐतिहासिक कस्तूरचंद पार्क जैसे प्रेरणादायी स्थान पर यह तिरंगा फहराना नागपुर के लिए गर्व का क्षण है, ऐसा ‘लोकमत मीडिया समूह के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व राज्यसभा सांसद’ डॉ. विजय दर्डा ने कहा.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रध्वज का प्रत्येक रंग जीवन-मूल्य का संदेश देता है. केसरिया रंग त्याग, शौर्य और समर्पण का, सफेद रंग सत्य, शांति और पारदर्शिता का, जबकि हरा रंग प्रकृति और विकास का प्रतीक है. अशोकचक्र कर्तव्य के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.

डॉ. विजय दर्डा ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत युवा हैं. उनकी आशाओं, आकांक्षाओं, भावनाओं और विचारों को समझना आवश्यक है. आज के युवाओं की भाषा और अभिव्यक्ति का तरीका अलग है. इसलिए पीढ़ियों के बीच की दूरी कम करके उनके साथ संवाद करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि नागपुर में विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन युवाओं के रोजगार की समस्या को गंभीरता से हल करने की जरूरत है. इसके लिए उद्योग क्षेत्र का विस्तार महत्वपूर्ण है. ‘खबरों के साथ-साथ लोगों का जीवन कैसे सुगम होगा और राष्ट्र कैसे मजबूत होगा’, इस ओर ध्यान देना चाहिए, यह बाबूजी जवाहरलाल दर्डा का विचार था. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्र प्रथम, समाज प्रथम’ का संकल्प लेने का आह्वान डॉ. विजय दर्डा ने किया.