जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों और दोषसिद्ध बंदियों के लिए अहम निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति के विचाराधीन बंदी या दोषी होने मात्र से उसे अथवा उसके परिवार को नागरिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों में जेलों और संबंधित संस्थानों में विशेष कैंप लगाकर बंदियों के KYC अपडेट, आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले में कलेक्टर के माध्यम से ऐसे कैंप आयोजित कराए जाएं। इन कैंपों में बंदियों के जरूरी दस्तावेज और बायोमेट्रिक संबंधी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। कोर्ट ने व्यवस्था की निगरानी के लिए कलेक्टरों को प्रगति की मासिक रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से प्रस्तुत करने को भी कहा है।
एक जमानत अर्जी से सामने आई बड़ी समस्या
मामला सिंगरौली निवासी प्रहलाद प्रसाद विश्वकर्मा की अपील से सामने आया। प्रहलाद ने पॉक्सो एक्ट के मामले में 2 मई 2025 को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए सजा निलंबित करने की मांग की थी। याचिका में उसने अपने बेटे के एम्स भोपाल में ब्लड कैंसर के उपचार और बैंक खाता संचालित करने के लिए अपने बायोमेट्रिक केवाईसी विवरण अपडेट कराने की आवश्यकता का हवाला दिया था।सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह महत्वपूर्ण तथ्य आया कि जेलों में बंद कई आरोपियों और दोषसिद्ध व्यक्तियों के बायोमेट्रिक विवरण उपलब्ध या अपडेट नहीं होने के कारण उनके बैंक खाते संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर उनके परिवारों पर पड़ रहा है। कई मामलों में परिवार बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी दिक्कत आ रही है।
‘बंदी होना अधिकारों से वंचित करने का आधार नहीं’
कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का जेल में होना अपने आप में उसके नागरिक अधिकारों और उसके परिवार के कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े अधिकारों को खत्म नहीं करता। इसी समस्या के व्यापक समाधान के लिए अदालत ने पूरे प्रदेश में विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया।
अदालत के निर्देश के बाद अब जिला स्तर पर कलेक्टरों की जिम्मेदारी होगी कि जेलों और संबंधित संस्थानों में कैंप आयोजित कराकर बंदियों के आवश्यक दस्तावेज तैयार और अपडेट कराए जाएं। इन कैंपों की प्रगति की नियमित निगरानी भी की जाएगी।
परिवार पर न पड़े जेल की सजा का अतिरिक्त बोझ
इस मामले का व्यापक पहलू यह है कि किसी व्यक्ति के जेल जाने का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। बैंक खाता, आधार, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया अटकने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य इसी व्यावहारिक समस्या को दूर करना है, ताकि जेल में बंद व्यक्ति की स्थिति के कारण उसके परिवार को बुनियादी नागरिक सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से अनावश्यक रूप से वंचित न होना पड़े।मामले में अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अग्निवेश दुबे और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरविन्द सिंह ने पक्ष रखा।