जबलपुर। जिला कोषालय कार्यालय में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयकों में बार-बार आपत्ति लगाकर उन्हें परेशान करने का आरोप मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने लगाया है। संघ का कहना है कि आपत्तियों के निराकरण के लिए कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और अपने ही हक के पैसे हासिल करने में अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है।
संघ के अनुसार अवकाश नगदीकरण, उपादान और बीमा राशि सहित विभिन्न देयकों को आपत्ति लगाए बिना पास नहीं किया जाता। नियमानुसार आपत्ति की प्रविष्टि कंप्यूटर में दर्ज की जानी चाहिए, लेकिन आरोप है कि संबंधित कर्मचारी आपत्ति लगाकर बिल कार्यालय में ही रोक देते हैं। इससे आपत्ति का समय पर निराकरण नहीं हो पाता और भुगतान की प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है।
एक ही देयक में कई बार आपत्ति का आरोप
संघ का आरोप है कि कर्मचारियों के मासिक वेतन पत्र, उपादान, पेंशन, अवकाश नगदीकरण, जीपीएफ, बीमा और मेडिकल बिलों में कई-कई बार आपत्तियां लगाई जा रही हैं। इसके कारण जिले के सैकड़ों कर्मचारियों को समय पर वेतन और अन्य देयकों का भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
बीमार कर्मचारियों को भी मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए पहले विभाग और फिर कोषालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संघ का कहना है कि मेडिकल बिलों का भुगतान समय पर नहीं होने से कई कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है और इलाज में भी दिक्कत आती है।
अवैध वसूली का रास्ता निकालने का आरोप
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ही देयक में बार-बार आपत्ति लगाकर कथित तौर पर अवैध वसूली का रास्ता निकाला जाता है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में देयकों से कागज अलग कर दिए जाते हैं तथा ओवरराइटिंग या राशि और आंकड़ों में बदलाव जैसी आपत्तियां भी सामने आती हैं।संघ ने मांग की है कि यदि किसी देयक में सुधार की आवश्यकता है तो एक ही बार में सभी आपत्तियां दर्ज कर संबंधित कार्यालय को भेजी जाएं, ताकि कर्मचारी समय पर कमियां दूर कर सकें और उनके भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जबलपुर जिला शाखा अध्यक्ष अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, विवेक रंजन शुक्ला, बृजेश मिश्रा, सुशील गुप्ता, अर्जुन सोमवंशी, शिवदयाल प्रधान, एसपी बाथरे, रवि बांगड़, राजू मस्के, जीपी द्विवेदी, अरविंद साहू, संजय रजक, संजय मजूमदार, बलराम रजक और गुलाब कोस्टा ने जिला कोषालय से इस व्यवस्था में सुधार की मांग की है।अगर चाहें तो इसे और तीखे खोजी अंदाज में “आपत्ति के नाम पर वसूली?” जैसी हेडलाइन और ज्यादा दमदार शुरुआत के साथ भी बनाया जा सकता है।