रक्षा निर्माणियों में काला बैज लगाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन

जबलपुर, । अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के मीडिया प्रमुख उत्तम विश्वास से प्राप्त जानकारी के अनुसार महासंघ के आह्वान पर चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत सोमवार को जबलपुर की सभी रक्षा निर्माणियों में कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर काला बैज लगाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री खमरिया, व्हीकल फैक्ट्री तथा ग्रे आयरन फाउंड्री सहित सभी रक्षा निर्माणियों के कर्मचारियों ने काला बैज धारण कर केंद्र सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने महासंघ द्वारा उठाई गई मांगों को तत्काल स्वीकार करने की मांग की।

प्रमुख मांगें

– चारों श्रम संहिताओं को वापस लिया जाए तथा पूर्ववर्ती श्रम कानूनों में उपलब्ध हड़ताल के अधिकार सहित श्रमिकों के अधिकार बहाल किए जाएं।
– केंद्र सरकार के विभागों, विशेषकर रक्षा प्रतिष्ठानों में सभी रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
– ठेका, आकस्मिक एवं निश्चित अवधि के कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित किया जाए।
– राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली समाप्त कर पुरानी परिभाषित एवं गारंटीकृत पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
– रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रेलवे एवं अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
– आयुध निर्माणियों एवं सेना की इकाइयों में अनुकंपा नियुक्ति पर लगाए गए कृत्रिम प्रतिबंध को हटाया जाए।
– आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के माध्यम से 1 जनवरी 2026 से न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये तथा 3.83 का गुणांक लागू किया जाए।
– 69 लाख पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनभोगियों की पेंशन का आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के माध्यम से पुनरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।

चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने का ऐलान

इस अवसर पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा कि उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में कर्मचारियों का संघर्ष आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

प्रदर्शन में रक्षा निर्माणियों के कर्मचारी एवं विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कर्मचारियों ने “मजदूर एकता जिंदाबाद” और “अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
मध्यप्रदेश की रक्षा निर्माणियों में आंदोलन को सफल बनाने में अर्नब दास गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह, विनय गुप्ता, रोहित यादव, अमरीश सिंह, राजेश मिश्रा, राकेश दुबे, मनोज साहू, शिव पांडे और माखन सिंह चाहर सहित विभिन्न पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।