जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में 13 कर्मचारियों के नियमितीकरण के बाद शुरू हुआ प्रशासनिक विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। कुलसचिव और कुलगुरु के बीच मतभेद की चर्चाओं के बीच विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव (स्थापना) हितेश कोडापे ने स्थापना विभाग के प्रभार से कार्यमुक्त किए जाने के लिए कुलसचिव को पत्र लिखा है। कुलसचिव ने यह पत्र अग्रिम कार्रवाई के लिए कुलगुरु कार्यालय भेज दिया है।बताया जा रहा है कि स्थापना विभाग में पदोन्नति और वरिष्ठता सूची को लेकर लगातार बन रहे दबाव के बीच सहायक कुलसचिव ने यह कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के गलियारों में इस पत्र को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पदोन्नति और वरिष्ठता सूची को लेकर दबाव का आरोप
कुलसचिव को भेजे पत्र में सहायक कुलसचिव हितेश कोडापे ने उल्लेख किया है कि 15 जुलाई को उन्हें स्थापना विभाग का कार्यभार सौंपा गया था। इसके बाद से कर्मचारियों एवं अधिकारियों की पदोन्नति और वरिष्ठता सूची के प्रकाशन को लेकर उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा है कि इस दबाव के कारण वे बेहद आहत और मानसिक रूप से दबाव महसूस कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्होंने स्थापना विभाग का प्रभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपकर उन्हें इस दायित्व से मुक्त करने का अनुरोध किया है। उनका आवेदन 6 अगस्त को प्रस्तुत किया गया, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दर्ज किए गए हैं।
70 पदों की पदोन्नति निरस्त, लेकिन विश्वविद्यालय का आदेश अब तक नहीं
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू विश्वविद्यालय में पदोन्नति के 70 पदों से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार इन पदों को राजभवन द्वारा निरस्त किया जा चुका है। हालांकि, इस संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है।
नतीजतन यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि निरस्त किए गए 70 पद कौन-कौन से हैं और पूर्व में प्रस्तावित पदोन्नति का लाभ किन-किन कर्मचारियों को मिलना था। पदोन्नति की सूची भी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच असमंजस और बेचैनी की स्थिति बनी हुई है।
13 कर्मचारियों के नियमितीकरण के बाद बढ़ा विवाद
आरडीयू में 13 कर्मचारियों के नियमितीकरण के बाद प्रशासनिक स्तर पर पहले से चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। स्थापना विभाग से जुड़े निर्णय, पदोन्नति, वरिष्ठता सूची और निरस्त पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कर्मचारियों में भी चर्चाओं का दौर जारी है।सहायक कुलसचिव द्वारा स्थापना विभाग का प्रभार छोड़ने की इच्छा जताए जाने से यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। अब निगाहें कुलगुरु और कुलसचिव कार्यालय की ओर हैं कि स्थापना विभाग के प्रभार को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है।