जबलपुर। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (एमपीएमएसयू) के पुनर्गठन को लेकर जबलपुर में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड के बंटवारे पर तत्काल रोक लगाई जाए और जबलपुर तथा उज्जैन के बीच वित्तीय संसाधनों का समान और न्यायसंगत विभाजन सुनिश्चित किया जाए। जनसंगठनों की जबलपुर में आयोजित की गई बैठक के बाद नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि यदि वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार फंड का बंटवारा किया गया तो जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी को एम्स जैसी संस्थान बनाने की बात कही थी, लेकिन इसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
‘जबलपुर के साथ हो रहा वित्तीय असंतुलन’……..
डॉ. नाजपांडे ने बताया कि विधानसभा में प्रस्तुत विधेयक के अनुसार उज्जैन विश्वविद्यालय के अधीन छह संभागों के करीब 70 मेडिकल कॉलेज और लगभग 60 हजार छात्र होंगे, जबकि जबलपुर विश्वविद्यालय के हिस्से में केवल चार संभाग, 15 कॉलेज और लगभग 12 हजार छात्र आएंगे। ऐसे में बजट और संसाधनों के वितरण में भी जबलपुर का हिस्सा काफी कम रह जाएगा। उन्होंने दावा किया कि 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड के प्रस्तावित बंटवारे में लगभग 200 करोड़ रुपये उज्जैन और 50 करोड़ रुपये जबलपुर को मिलने की संभावना है, जिससे जबलपुर विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी।
‘अस्तित्व पर मंडरा सकता है संकट’…………
मंच का कहना है कि यदि छात्रों की संख्या, बजट और रिजर्व फंड में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिली तो आने वाले वर्षों में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के विकास और अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि फंड के बंटवारे पर पुनर्विचार कर दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संतुलित व्यवस्था लागू की जाए। इस संबंध में विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक आयोजित कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया है, जिसमें जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के हितों की रक्षा के लिए ठोस निर्णय लेने की मांग की गई है।
बैठक में रजत भार्गव, डॉ.एबी श्रीवास्तव, सुभाष चंद्रा, टीके रायघटक, एड.वेदप्रकाश अधौलिया, संतोष श्रीवास्तव, डीके सिंह, एड.घनश्याम सोनकर, यशवंत कोष्टा, डीआर लखेरा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, एड.बृजेश साहू तथा राममिलन शर्मा उपस्थित थे|