सुहागी सेक्स रैकेट में पुलिस पर गिरी गाज,
टीआई को नोटिस, आरक्षक निलंबित
जबलपुर। अधारताल थाना क्षेत्र के सुहागी में संचालित हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी पर जवाबदेही तय करना शुरू कर दिया है। मामले में अधारताल थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि थाने में पदस्थ आरक्षक सतीश झारिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस की मिलीभगत की आशंका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल के निर्देश पर की गई विभागीय कार्रवाई के दौरान जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से पुलिस की नजरों के सामने संचालित हो रहा था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ पुलिसकर्मियों के संरक्षण के कारण ही यह नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा।
चार साल से चल रहा था अवैध कारोबार
पुलिस जांच के अनुसार, सुहागी स्थित निमेष विनोदिया के मकान में पिछले करीब चार वर्षों से देह व्यापार का यह नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस रैकेट का संपर्क केवल जबलपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से भी युवतियों को बुलाकर इस अवैध धंधे का संचालन किया जाता था।
आरक्षक पर गंभीर आरोप
जांच में अधारताल थाने के आरक्षक सतीश झारिया की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। आरोप है कि वह इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने के साथ-साथ अपनी वर्दी और पद का प्रभाव दिखाकर संचालकों से मोटी रकम वसूलता था। प्रथम दृष्टया मिले तथ्यों के आधार पर उसे तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
10 जुलाई को हुआ था खुलासा
गौरतलब है कि 10 जुलाई को अधारताल के सुहागी स्थित सरस्वती कॉलोनी के पन्नी मोहल्ला में पुलिस ने छापा मारकर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक निमेष विनोदिया, मुख्य संचालिका मंजू निखर, उसके पति मुकेश निखर तथा पुत्र आरुष निखर को गिरफ्तार किया गया था। मौके से ग्राहक अभय सिंह, सुबोध सिंह और संजय चौरसिया को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। अब विभागीय जांच का दायरा बढ़ने के साथ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है।