जबलपुर। शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले संस्कारधानी के ख्यातिलब्ध साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद पं. हरिकृष्ण त्रिपाठी की 11वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को श्री जानकीरमण महाविद्यालय में गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “संस्कारधानी” नाम की सार्थकता पं. हरिकृष्ण त्रिपाठी जैसे विद्वान मनीषियों के कारण ही बनी हुई है।
कार्यक्रम का शुभारंभ रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा एवं अन्य अतिथियों द्वारा पं. हरिकृष्ण त्रिपाठी की प्रतिमा पर पूजन-अर्चन, पुष्पांजलि एवं तैलचित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ साहित्यकार शरदचंद पालन ने पं. त्रिपाठी को निष्ठावान शिक्षाविद बताते हुए उनके साथ जुड़े संस्मरण साझा किए। डॉ. कौशल दुबे ने कहा कि पं. त्रिपाठी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण श्री जानकीरमण महाविद्यालय साहित्यिक और बौद्धिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उदयभानु तिवारी ने कहा कि जबलपुर को “संस्कारधानी” की पहचान दिलाने में ऐसे व्यक्तित्वों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक मिश्र ने पं. त्रिपाठी के अनुशासित, प्रेरणादायी और अनुकरणीय व्यक्तित्व को याद किया, जबकि उमाशंकर दुबे ने उन्हें शिक्षा, साहित्य और पत्रकारिता की त्रिवेणी की संज्ञा दी। अभिमन्यु जैन ने अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख किया। वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश मिश्र ‘विचित्र’ ने पं. त्रिपाठी को साहित्य और शिक्षा का “इनसाइक्लोपीडिया” बताते हुए कहा कि उन्हें पुराने और नए साहित्यकारों का अद्भुत ज्ञान था और ऐसे व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं।
कार्यक्रम में डॉ. गंगाधर त्रिपाठी, डॉ. अनामिका सिंह, गोपाल प्रसाद, मुकेश श्रीवास्तव, राखी बाजपेई, मानसी गौतम, कंचन दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, साहित्यकार और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आनंद सिंह राणा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. अभिजात त्रिपाठी ने व्यक्त किया।