जबलपुर। मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि वर्ष 2026-27 के नए शैक्षणिक सत्र के एकेडमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान किया जा रहा है, तो अगली सुनवाई में पूरा कैलेंडर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2026-27 का नया एकेडमिक कैलेंडर अंतिम चरण में है और उसमें छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई में कैलेंडर पेश करने के निर्देश दिए।
2017 से बंद हैं छात्रसंघ चुनाव
जबलपुर निवासी अदनान अंसारी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी महाविद्यालयों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के बावजूद वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। याचिका में इसे विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया गया है।
कोर्ट का सवाल- कोविड खत्म हुए चार साल, फिर चुनाव क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि पहले कोविड-19 महामारी और बाद में नई शिक्षा नीति (एनईपी) लागू होने के कारण छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं हो सके। इस पर खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए पूछा कि कोविड महामारी समाप्त हुए चार वर्ष बीत चुके हैं, फिर पिछले शैक्षणिक सत्र में भी चुनाव क्यों नहीं कराए गए?
सरकार ने जवाब दिया कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद सितंबर-अक्टूबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने पर विचार किया जा रहा है और इसका प्रावधान नए एकेडमिक कैलेंडर में शामिल किया जाएगा।