ग्वालियर/भोपाल। पंजाब नेशनल बैंक की अशोकनगर शाखा में 5 करोड़ 49 लाख 88 हजार रुपये के कथित ऋण घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने के बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक, वेयर हाउस संचालक, एससीएमएल कंपनी के कर्मचारियों एवं कई हितग्राहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। प्रेस नोट के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक, अशोकनगर शाखा में हुई वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पुलिस अधीक्षक, EOW ग्वालियर को प्राप्त हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद प्रकरण दर्ज कर इसकी विस्तृत जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से 2019 के बीच बैंक से स्वीकृत ऋण की राशि जमा कराए बिना ही वेयर हाउस में रखे माल को रिलीज कर दिया गया, जिससे बैंक को 5.49 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
जांच में तत्कालीन शाखा प्रबंधक नितिन जायसवाल, एससीएमएल कंपनी के कर्मचारी राजकुमार मीणा एवं सचिन्द्र जैन, वेयर हाउस संचालक राजेन्द्र कुमार एवं श्रेयांश कुमार तथा हितग्राही बुंदेल सिंह गुर्जर, सुरेश सिंह यादव, बृजेश गुर्जर (फोटो), सत्यपाल सिंह, विमलेश राजपूत और गजेन्द्र सिंह राजपूत की भूमिका सामने आई है।
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
EOW की जांच में पाया गया कि बैंक अधिकारियों ने ऋण स्वीकृत करने से पहले हितग्राहियों का सिविल रिकॉर्ड सत्यापित नहीं किया। जिस वेयर हाउस में कृषि उपज रखी गई थी, वहां स्टॉक एवं स्टॉक रजिस्टर का सत्यापन भी नहीं किया गया।
इसके अलावा, वेयर हाउस में रखे माल की रसीद प्राप्त होने के बावजूद नियमानुसार कोलेट्रल मैनेजर को कोई पत्र जारी नहीं किया गया और न ही आवश्यक रिकॉर्ड संधारित किया गया। ऋण राशि जमा नहीं होने के बावजूद वेयर हाउस से माल रिलीज करने के आदेश जारी कर दिए गए, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि हुई।
इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
प्रथम दृष्टया आपराधिक साक्ष्य मिलने पर EOW ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की धाराएं 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(क) सहपठित धारा 13(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।