एसी कोच में 15 तोला सोना और 50 हजार नकद चोरी, ट्रेन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

जबलपुर। भारतीय रेलवे की एसी बोगियों को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन लोकमान्य तिलक टर्मिनस काशी एक्सप्रेस में हुई लाखों रुपये की चोरी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चलती ट्रेन की एसी बोगी से महिला यात्री का पर्स चोरी कर उसमें रखे करीब 15 तोला सोने के जेवर और 50 हजार रुपये नकद पार कर दिए गए। वारदात इतनी शातिर तरीके से अंजाम दी गई कि यात्रियों को भनक तक नहीं लगी। घटना की जांच अब जबलपुर जीआरपी को सौंपी जा रही है।

जानकारी के अनुसार मुंबई निवासी अनीता पाठक अपने परिवार के साथ 15017 एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस के एसी कोच ए-2, सीट नंबर-3 पर यात्रा कर रही थीं। सुबह करीब पांच बजे उनकी नींद खुली तो सीट के पास रखा पर्स गायब था। कोच में तलाश करने पर पर्स ट्रेन के बाथरूम में मिला, लेकिन उसमें रखे 15 तोला सोने के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद गायब थे। इतना ही नहीं, चोर ने महिला का मोबाइल फ्लाइट मोड पर डाल दिया था, जिससे परिजन या अन्य लोग तत्काल संपर्क नहीं कर सकें।

क्या एसी कोच भी अब सुरक्षित नहीं?………

इस घटना ने रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस एसी कोच में प्रवेश सीमित होता है और टीटीई तथा सुरक्षा कर्मियों की नियमित आवाजाही रहती है, वहां से लाखों रुपये के जेवर और नकदी चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है। घटना से यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी ने पहले से यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखी और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दिया।

जबलपुर जीआरपी करेगी जांच……

पीड़िता की शिकायत पर प्रयागराज जीआरपी ने मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वारदात जबलपुर रेलखंड में हुई होने की संभावना के चलते जांच जबलपुर जीआरपी को स्थानांतरित की जा रही है। पुलिस अब ट्रेन के विभिन्न स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध यात्रियों की गतिविधियों और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा अमले की भूमिका की जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि वारदात किसी संगठित गिरोह या सहयात्री की मिलीभगत से तो नहीं हुई।

यह घटना एक बार फिर लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। यात्रियों को भी कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।