भोपाल* अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 के अवसर पर रवींद्र भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सर्च एंड रिसर्च डेवलपमेंट सोसाइटी, भोपाल द्वारा विकसित ‘बाँसकारी’ कॉमन फैसिलिटी सेंटर से साझा सुविधाओं से स्थापित अर्पित इंटरप्राइजेज के स्टॉल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने बाँस से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की सराहना करते हुए संचालकों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाँस आधारित एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बाँस शिल्प आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन रहा है।
इस अवसर पर एमएसएमई मंत्री श्री चेतन कश्यप, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह एवं उद्योग आयुक्त तथा एमएसएमई आयुक्त श्री दिलीप कुमार ने भी ‘बाँसकारी’ स्टॉल का अवलोकन किया। अधिकारियों ने बाँस शिल्प उत्पादों की गुणवत्ता और नवाचार की प्रशंसा की तथा उद्यम को हर संभव सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।
‘बाँसकारी’ स्टॉल पर बाँस से बने फर्नीचर, सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं एवं पर्यावरण हितैषी उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिन्हें आगंतुकों ने खूब सराहा।
सर्च एंड रिसर्च डेवलपमेंट सोसाइटी की चेयरपर्सन डॉ. मोनिका जैन ने बताया कि स्टॉल पर प्रदर्शित सभी सामान ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित हैं। सोसाइटी ने पहले इन महिलाओं को दो साल तक गहन प्रशिक्षण दिया, जिसके बाद उनमें यह हुनर विकसित हुआ। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।अर्पित इंटरप्राइजेज के अर्पित बछोतिया ने बताया की हरदा जिला बांस का ओडीओपी जिला होने के कारण यहां काम करने में सरलता हे सोसाइटी के डॉ. राजीव जैन ने बताया कि महिलाओं को पारंपरिक शिल्प के साथ-साथ टेक्नोलॉजी इनोवेशन की भी ट्रेनिंग दी गई, जिससे उनकी कार्य क्षमता और उत्पादकता बढ़ी है। सोसाइटी इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को विभिन्न प्रदर्शनियों में भागीदारी दिलवाकर बाजार उपलब्ध करवा रही है, ताकि उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके।