जबलपुर। जबलपुर के कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। क्षेत्र के दो प्रमुख कृषि उत्पाद—जबलपुरी मटर और जबलपुर सिंघाड़ा—को भारत सरकार की भौगोलिक संकेतक (जीआई) रजिस्ट्री से जीआई टैग मिल गया है। इसके साथ ही देश में पहली बार किसी क्षेत्र के मटर और सिंघाड़े को यह विशेष पहचान प्राप्त हुई है।
आवेदक संस्था मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, पाटन के निदेशक राघवेन्द्र सिंह पटेल और धनंजय पटेल ने बताया कि सिंघाड़े के लिए अक्टूबर 2023 और जबलपुरी मटर के लिए जनवरी 2024 में आवेदन किया गया था। आवश्यक दस्तावेजों और ऐतिहासिक प्रमाणों के परीक्षण के बाद जीआई रजिस्ट्री, चेन्नई ने दोनों उत्पादों को अपनी आधिकारिक जीआई जर्नल में विज्ञापित और पंजीकृत कर दिया।
जीआई टैग प्रक्रिया से जुड़े पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने बताया कि यह प्रमाणित करता है कि इन उत्पादों की विशिष्ट गुणवत्ता, ऐतिहासिक महत्व और भौगोलिक पहचान को सरकार ने स्वीकार किया है। यह उपलब्धि जबलपुर की कृषि विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
जीआई टैग मिलने से जबलपुरी मटर और सिंघाड़े की प्रमाणिकता सुनिश्चित होगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी, जबकि नकली ब्रांडिंग पर भी रोक लगेगी। अब अन्य क्षेत्रों के उत्पादों को ‘जबलपुरी’ नाम से बेचना संभव नहीं होगा।
निर्यात और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी बढ़ेगी। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कोल्ड स्टोरेज, फ्रोजन मटर, सिंघाड़े के आटे सहित मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
यह उपलब्धि न केवल जबलपुर की कृषि पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाएगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।