जबलपुर। इंडियन वेसल्स एक्ट 2021 में कहीं भी उल्लेख नहीं है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज़ को जांच के पूर्व में नष्ट किया जाये, जिला प्रशासन को भी ऐसा अधिकार नहीं है।
इस दलील के साथ नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा प्रस्तुत याचिका पर मंगलवार को जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष सुनवाई हुई। जस्टिस द्विवेदी ने आदेश पारित किया कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की याचिका में प्रस्तुत बिंदुओं को जांच में प्रमुखता से लिया जायेगा तथा मंच को पुनः जांच के दौरान सुनवाई के लिये अवसर दिया जायेगा।
इसके पूर्व में मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा एड. वेदप्रकाश अधौलिया ने कलेक्टर कार्यालय के कमरा नं. 43 में जाकर जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस द्विवेदी के समक्ष उपस्थिति दर्ज कर याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 12 सितम्बर 2023 को स्पष्ट आदेश दिये हैं कि क्रूज़ में फोर स्ट्रोक इंजन होना चाहिये लेकिन दुर्घटनाग्रस्त क्रूज़ में मात्र 100 एच.पी. का इंजन था और उसमें भी दूसरा इंजन फेल हो गया था। एन.जी.टी. के आदेशानुसार पर्यावरण के नियमों का पालन होना था किंतु क्रूज़ संचालकों के पास ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं था। जब क्रूज़ नष्ट कर दिया गया तब उसका फिटनेस की जांच कैसे होगी?
आयोग ने चिंता व्यक्त की……………
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के पैरा 132 में निर्देश है कि बोट के फिटनेस की पहली प्राथमिकता होना चाहिये। लेकिन जब बोट ही नष्ट कर दिया गया है तब फिटनेस की जांच कैसे होगी? इस बिंदु पर जांच आयोग ने चिंता व्यक्त करते हुये याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करें।
यहां उल्लेखनीय है कि गत 30 अप्रैल को बरगी बांध में क्रूज दुर्घटना के बाद राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने मंगलवार से सुनवाई आरंभ कर दी है।