सर्वमंगल की कामना और परस्पर सहयोग से ही होता है धरती में स्वर्ग का निर्माण: नरसिंह देवाचार्य जी महाराज

जबलपुर – श्रीमद् भागवत हर प्राणी को जीवन में सत्कर्म करते हुए जीवन यापन करने की सीख देती है। आचार्य श्री ने राजा परीक्षित के माध्यम से हम सभी को अभीष्ट ज्ञान दिया है।
जीवन में शांति, संंतोष, प्रसन्नता और आनंद का होना ही हमारे जीवन का वास्तविक स्वर्ग है। मरने के बाद स्वर्ग की प्राप्ति से श्रेष्ठ बात यह है कि जीते जी, जीवन में स्वर्ग जैसी परिस्थितियों का निर्माण कर लेना चाहिए। सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार रखते हुए, छल, कपट, दंभ रहित होकर ,परस्पर प्रीति, सहयोग एवं सर्व मंगल की कामना में समाविष्ट आनंदपूर्ण जीवन ही स्वर्ग समान है।
               दूसरी ओर जहाँ पर दूसरों के साथ छल – कपट का व्यवहार किया जाता हो, दूसरों को गिराने की योजनायें बनाईं जाती हों और ईर्ष्यावश दूसरों की उन्नति में अवरोध उत्पन्न किया जाता हो वह जीवन नरक के ही समान है। नरक अर्थात वह वातावरण जिसका निर्माण हमारी दुष्प्रवृत्तियों और हमारे दुर्गुणों द्वारा होता है।
अतः जीवन में सदाचरण स्वर्ग और दुराचरण नरक का परिचायक है। उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने
गीता धाम में श्रीमद् भागवत महापुराण में प्रथम दिवस कहे।
वैशाख मास के मंगल अवसर पर गीता धाम गौरी घाट में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का श्रवण जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से 13 अप्रेल से 19 अप्रेल तक सायं 4 बजे से भक्तों को करायेंगे।
प्रथम दिवस कलश यात्रा, देव आवाहन के पश्चात भागवत महात्म की कथा सुनाई।
श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण करने का आग्रह घनश्याम दास शर्मा, प्रणव शर्मा ,अर्चना शर्मा , अर्शिता , प्रथव , रामावतार शर्मा ,मालती शर्मा
प्रकाश चंद्र शर्मा , गायत्री शर्मा ब्रम्हचारी हिमांशु जी, कामता प्रसाद, आचार्य रामफल शास्त्री,संदीप मिश्रा, प्रियांशु,राजेन्द्र यादव, सहित नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त परिवार ने किया है।